कोरोना से हुई मौत-इलाज का बिल नहीं चुका सके परिजन तो हॉस्पिटल ने गिरवी रख ली कार

कोरोना महामारी से जुड़ी दिल दहला देने वाली खबरों से मीडिया भरा पड़ा है। ऐसी एक और खबर गुजरात के वलसाड़ से आई है।यहां के एक अस्पताल में एक मरीज़ की मौत हो गई, परिजनों के पास बिल चुकाने के रुपए नहीं थे तो अस्पताल ने शव देने से इंकार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने कार गिरवी रखकर उसका शव छुड़वाया। दरअसल, गुजरात के वलसाड़ जिले में एक परिवार ने आरोप लगाया है कि एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर ने उनके रिश्तेदार की मौत के बाद डेडबॉडी देने से इनकार कर दिया और पूरा बिल चुकाने की मांग की। DEMO PHOTO

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पूरा प्रकरण वापी के जाने-माने अस्पताल 21 सेंचुरी का है। अस्पताल में हज़ारों-लाखों रुपए फूंकने के बाद भी जब कोई अपने परिजन को नहीं बचा पता तो मानसिक तौर पर टूट जाता है, उसके बाद शव देने से पहले बिल चुकाने का दबाव अपने आप में असंवेदनशीलता है। कोरोना महामारी के बीच परिजनों को अपनी कार अस्पताल के पास गिरवी रखनी पड़ी ताकि वो अपने रिश्तेदार का शव छुड़वा सकें।

न्यूज़ चैनल आज तक के मुताबिक, पुलिस जब वहां पहुंची, तो अस्पताल वालों ने दबाव में आकर परिजनों को उनकी कार लौटा दी। ये मामला केवल अस्पताल की असंवेदनशीलता पर सवाल नहीं खड़े करता, बल्कि सरकार की कोरोना से लड़ने की तैयारी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। सरकारी अस्पतालों में तो हमेशा ही मारामारी रहती है, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों तक में मरीज़ों के लिए स्वस्थ्य सुविधा नहीं है।

जिन लोगों को किसी तरह भर्ती होने के लिए बेड मिल जा रहा है वो भी महंगी हुई दवाइयों और ऑक्सीजन का बिल नहीं चुका पा रहे। भारत में ऐसी महामारी से लड़ने के लिए सरकार ने न तो कोई तैयारी की, और न ही आम जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को सस्ता करवाया।

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