अभी-अभी: अब भारतीय वायुसेना हो जाएगी और भी मजबूत, रूस से भारत खरीदेगा 18 सुखोई-30 जेट

PATNA:  भारतीय वायुसेना इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है। भारतीय वायुसेना में स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तादाद घटकर अब 31 स्क्वाड्रन की रह गई है। इनमें मिग-21 60 के दशक का और जगुआर 70 के दशक में वायुसेना में शामिल हुआ था। लेकिन अब भारतीय वायुसेना और अधिक मजबूत हो जाएगी। भारतीय वायुसेना रूस से 18 यानि एक स्क्वाड्रन सुखोई-30 मल्टीरोल फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में है। इस सौदे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

रूस से आने वाले नए 18 सुखोई से वायुसेना की एक स्क्वाड्रन तैयार होगी। रूस से उसके स्टोर में रखे हुए 20 मिग-29 अपग्रेड खरीदने की बातचीत भी अपने आखिरी दौर में है। ये मिग-29 भारत को बहुत कम कीमत में मिल रहे हैं। फिलहाल 50 मिग-29 की तीन स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना में हैं। मिग-29 भी एक मल्टी रोल फाइटर जेट है, जिसे भारतीय वायुसेना ने 1985 से शामिल करना शुरू किया था। भारत ने 90 के दशक में रूस से 272 सुखोई 30 का सौदा किया था, जिनमें से 50 को रूस में और बाकी को भारत में तैयार करना था। ये कार्यक्रम अपने तय समय से चल रहा है और भारतीय वायुसेना में 200 से ज्यादा सुखोई शामिल हो चुके हैं।

स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस अपने उत्पादन के शुरुआती दौर में है और अभी उसकी एक स्क्वाड्रन की पूरी नहीं हो पाई है। फ्रांस से 36 रफाल फाइटर खरीदे गए हैं, जिनके इस साल सितंबर में वायुसेना को मिलने और अगले मई तक भारत आने की संभावना है। इनसे दो स्क्वाड्रन बनेंगी, जिन्हें अंबाला और पासीघाट में तैनात किए जाने की संभावना है।

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