भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाले का भंडाफोड़, 34,615 करोड़ की धोखाधड़ी, वधावन बंधुओं पर केस दर्ज

भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाले का भंडाफोड़, 34,615 करोड़ की धोखाधड़ी, वधावन बंधुओं पर केस दर्ज : सीबीआई ने अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड के मामले में डीएचएफएल के प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ नया केस दर्ज किया है। इन पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के समूह से 34,615 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह सीबीआई के पास दर्ज हुआ अब तक का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड है। इससे पहले एबीजी शिपयार्ड पर एसबीआई के नेतृत्व वाले 28 बैंकों के खिलाफ 22,842 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। पीएनबी घोटाला 13,578 हजार करोड़ रुपए का है जिसमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी आरोपी हैं।

सीबीआई अधिकारियों ने बताया, जांच एजेंसी ने यूबीआई की शिकायत पर डीएचएफएल के तत्कालीन सीएमडी कपिल वधावन, डायरेक्टर धीरज वधावन और छह रियल्टी कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का केस 20 जून को दर्ज किया था। इन पर यूबीआई समेत 17 बैंकों के साथ धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप है। सीबीआई के 50 अधिकारियों की टीम ने बुधवार को आरोपियों के मुंबई स्थित 12 ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें अमरेलीज रियल्टर्स के सुधाकर शेट्टी और आठ अन्य बिल्डर्स शामिल हैं।

ई-मेल से लोन मंजूर लोन किए गए| सीबीआई की जांच में पता चला है कि कुछ मामलों में फर्जी कंपनियों ने जाली दस्तावेज के आधार पर ई-मेल के जरिए लोन की स्वीकृति बैंकों से दे दी गई। जबकि फर्जी कंपनियों को दिए गए लोन की कोई फाइल मेंटेन नहीं की गई।

यूबीआई की शिकायत पर एक्शन
यूबीआई के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के समूह ने डीएचएफएल को 2010 से 2018 के बीच 42,871 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। बैंकों का आरोप है कि डीएचएफएल के अकाउंट्स ऑडिट से पता चला कि कंपनी ने वित्तीय अनियमितताएं कीं हैं। आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां कागजों में खड़ी कीं। उन कंपनियों के फर्जी खाते और अकाउंट ऑडिट रिपोर्ट बनवाई। फर्जी कंपनियों के फर्जी लेन-देन व टर्नओवर दिखाकर कर्ज लिया गया। यूबीआई की बांद्रा (मुंबई )स्थित इंडस्ट्रियल फायनेंस ब्रांच की दिए गएलोन की समीक्षा में यह बात सामने आई। जब कंपनी ने मई 2019 में कर्ज की अदायगी में चूक की तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। बैंक ने अपनी शिकायत में ऑडिट फर्म केपीएमजी की जांच के नतीजों का भी जिक्र किया है। केपीएमजी ने पाया था कि नियमों को ताक पर रखकर खातों के साथ छेड़छाड़ की गई।

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