चमकी बुखार से बिहार में बच्चे मर रहे हैं, पीएम मोदी योग करने में मस्त हैं, यह नौटंकी क्यों

PATNA : जिस देश में 30 करोड़ लोग भूखे सोते हैं, रोज़ 2000 बच्चे कुपोषण से मरते हैं, 41 करोड़ लोगों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा है, दर्जनों किसान रोज़ आत्मह-त्या करते हैं, वहां राजपथ पर योग दिवस का भव्य सरकारी आयोजन अश्लीलता की पराकाष्ठा है.

भारतीयता से प्रेम होता तो सरकार की पहली प्राथमिकता होती कि हम एक भी बच्चे को भूख और कुपोषण से नहीं म-रने देंगे. देश से प्रेम होता तो पहली प्राथमिकता होती कि एक भी किसान को फां-सी नहीं लगाने देंगे. योग से प्रेम था तो हमारे गोंडा में महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि पर कम से कम बिजली पानी पहुंचाते और एक धर्मशाला बनवा देते. वह सब नहीं करेंगे. वहां तो एक आयोजन भी नहीं हो रहा. बस नौटंकी करनी है.

योग को प्रमोट करना बुरा नहीं है, न ही मैं योग का विरोधी हूं. योग फिट रहने के लिए अच्छी चीज है, आम लोगों के लिए स्वस्थ रहने का अच्छा तरीक़ा मौजूद है योग में. लेकिन योग से पहले पेट की भूख मिटाना और जिंदा रहना जरूरी है. योग से स्वस्थ वह रह सकता है जिसका पेट भरा है. जो भूख और कुपोषण से म-र रहा है, उसके लिए योग सोने का लड्डू है. योग कम से कम 2200 बरस पुराना है, रामदेव और नये राष्ट्रवादियों की योग नौटंकी एकदम नई है. ये सब फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी हैं.

योग दिवस पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करके जो योग दिवस आयोजित करती है, वह फिजूलखर्ची है. पिछले साल केंद्र सरकार ने योग दिवस पर 20 करोड़ रुपये का आयोजन किया था. उस पैसे को बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दवाएं, डॉक्टर और मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम किया जाए. खाये अघाये लोग सांस अंदर बाहर करते हैं, इससे देश का कोई भला नहीं होने वाला. इस विलासिता की जगह मरते हुए बच्चों के लिए दवाई खरीदी जाए. जमीन पर लेटे बच्चों के लिए बिस्तर का इंतजाम हो, इंसान की जान बचाने से जरूरी कोई मूल्य नहीं है, न धार्मिक, न सांस्कृतिक. जय हिंद!

लेखक : कृष्णकांत, वरिष्ठ पत्रकार

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