महागठबंधन में राजद बड़ी पार्टी है तो निश्चित रूप से तेजस्वी ही सीएम होंगे : कन्हैया

जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष व सीपीआई नेता कन्हैया कुमार बिहार चुनाव को लेकर प्रदेश के दौरे पर हैं। महागठबंधन में उनकी पार्टी को छह सीटें मिली हैं और इन्हीं छह सीटों के बल पर उन्हें प्रदेश में अपनी पार्टी की रीढ़ खड़ी करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। हालांकि अभी तक कन्हैया ने केवल दो-तीन नामांकन सभाएं की हैं। फुल फॉर्म में आने में उन्हें अभी थोड़ा वक्त लग रहा है, क्योंकि पहले चरण की सीटों पर उनके प्रत्याशी नहीं है।

{आप बिहार के पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा बनना चाहते हैं? : क्यों नहीं। अगर सरकार चाहे तो मैं शिक्षा के लिए प्रदेश की पॉलिसी बना सकता हूं। मुझे इसमें खुशी होगी। आज बाहर रहने वाले सभी बिहारियों को आगे आना चाहिए। प्राकृतिक आपदा से बचाव के विशेषज्ञों को अपनी जन्मभूमि में आकर पॉलिसी बनाना चाहिए। तब ही हमारा विकास होगा। केवल एक व्यक्ति पर दोष मढ़ देने भर से कुछ नहीं होने वाला है।

{पहले चरण का चुनाव अभी सिर पर है, लेकिन आप कहीं नहीं दिख रहे हैं? : पहले चरण के चुनाव में हमारे प्रत्याशी नहीं हैं। वैसे तो मैं 12 अक्टूबर से ही बिहार में हूं। मधुबनी व बेगूसराय में पांच प्रत्याशियों के नामांकन सभा में मौजूद था। पार्टी ने अभी बेगूसराय की सातों सीट और सीपीएम की चार सीटों के लिए भी मेरी जिम्मेदारी तय की है।

{अब तक आप तेजस्वी यादव के साथ किसी मंच पर नजर नहीं आए हैं, जबकि वे आपके गठबंधन के जड़ हैं। ऐसा नहीं है। इलेक्शन को-ऑर्डिनेशन कमिटी हमारी सभाओं की रूपरेखा तैयार करती है। अगर हमदोनों की सभा साथ में रखी जाएंगी, तो हम दोनों साथ भी सभाएं करेंगे।

{महागठबंधन ने सीपीआई को केवल छह सीटें दी हैं। क्या आप इससे खुश हैं? सीटों का सवाल हमारे बीच नहीं है। प्रदेश का पूरा विकास हो हम बस यही चाहते हैं। मायने बस यही रखता है कि अगर हम सरकार में जाएं तो हमारा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम लागू होना चाहिए। संख्या नहीं नीति महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

{पार्टी को आगे ले जाने के लिए आपकी क्या प्लानिंग है?
मैं पिछले 18 साल से राजनीति से जुड़ा हूं। मैट्रिक पास करने के बाद ही मैंने एआईएसएफ की सदस्यता ली थी। लड़ो, पढ़ाई करने को और बढ़ो समाज बदलने की नीति हमलोगों की स्थापना काल से ही रही है।

{इस विधानसभा चुनाव को आप किस रूप में देखते हैं?शुरू में लोगों को लग रहा था कि ये चुनाव एकपक्षीय है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बिहार का कोई भी चुनाव एकतरफा हो ही नहीं सकता है। बिहारियों में राजनीति की समझ बहुत अच्छी होती है।

{बीते 15 वर्षों के विकास के बारे में आपकी क्या राय है।अगर प्रदेश में कार्य किए गए हैं, तो निश्चित रूप से उसको स्वीकार करने में हमें कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। एेसा नहीं है कि बिहार में कुछ नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि बिहार में सबकुछ है। एक ही व्यक्ति सभी विषयों का विशेषज्ञ नहीं हो सकता है। सरकार को भी विशेषज्ञों से पॉलिसी बनानी चाहिए।

{तेजस्वी के दस लाख रोजगार देने और मुख्यमंत्री नीतीश के उसपर सवाल खड़ा करने को आप कैसे देखते हैं?नीतीश कुमार का कहना जायज है कि दस लाख नौकरियों के लिए रुपये कहां से आएंगे। बिहार में राजस्व की कमी है। फिर भी अगर सरकार चाहे तो युवाओं को नौकरियां दे सकती हैं। कमी केवल इच्छाशक्ति की है। अगर इतनी है रुपये की कमी है सरकार के पास तो अभी जो चुनावी सभाओं के लिए हेलिकॉप्टर उड़ रहे हैं उसका खर्च कहां से वहन किया जा रहा है।

{कन्हैया कुमार बिहार से चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे हैं? आप सीएम कैंडिडेट क्यों नहीं है? क्या आप तेजस्वी को सीएम मान रहे हैं। हर जगह से मैं ही लड़ूं क्या? हमारी पार्टी के जो कार्यकर्ता हैं उन्हें भी हक है चुनाव लड़ने का। हमारी पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर चलती है और जहां तक सीएम बनने की बात है जो बड़ी पार्टी रहेगी सीएम उसी का होगा। हां, अगर महागठबंधन में राजद बड़ी पार्टी है तो निश्चित रूप से तेजस्वी ही सीएम होंगे या राजद जो भी निर्णय करेगा हम उसे मानेंगे।

{लोकसभा चुनाव में आपके खिलाफ तेजस्वी यादव ने बेगूसराय में अपना कैंडिडेट दे दिया। फिर भी आज आप उनके साथ खड़े हैं। चुनाव और राजनीति में समय-समय पर लोग फैसले बदलते रहते हैं। राजनीति में पुरानी बातों को ज्यादा दिनों तक याद नहीं रखा जाता है। उनकी उस वक्त इच्छा रही होगी कि हमारे खिलाफ उम्मीदवार दें, उन्होंने दिया।

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