19 अगस्त को जन्माष्टमी, दो साल बाद कृतिका नक्षत्र में लोग मनाएंगे भगवान कृष्ण का जन्म

भाद्र कृष्ण अष्टमी 19 अगस्त को दो साल बाद कृतिका नक्षत्र में जन्माष्टमी मनेगी। इसबार गृहस्थों-वैष्णव दोनों की जन्माष्टमी एक ही दिन मनेगी। पुराणों, धार्मिक ग्रंथों, मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र की मध्य रात्रि में वृष लग्न में हुआ था। इसलिए सामान्यतः कृष्ण जन्माष्टमी में रोहिणी नक्षत्र विद्यमान रहता है, लेकिन इसबार दो साल बाद एेसा नहीं होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार 19 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय से लेकर मध्य रात्रि 1.15 बजे तक ही है।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी पर ध्रुव योग के साथ जयद योग का युग्म संयोग बन रहा है। इस बार प्रभु श्रीकृष्ण का 5249वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस पुण्यकारी संयोग में कान्हा का जन्मोत्सव मनाने और उनका दिव्य व अलौकिक शृंगार कर माखन-मिश्री का भोग अर्पण करने से समस्त दुखों व शत्रुओं का नाश और जीवन में सुख, शांति व प्रेम जागृत होता है। जन्माष्टमी के दिन बाल कृष्ण या लड्डू गोपाल की पूजा, आराधना एवं लीला की गुणगान करने से संतान संबंधित सभी विपदाएं दूर होती हैं। साथ ही वैवाहिक सुख में वृद्धि व पारिवारिक सौहार्द, आपसी प्रेम व मिलाप के साथ जीवन में उन्नति होती हैं।

ऐसे करें पूजा और अर्पण
{ धन-धान्य व वंश वृद्धि के लिए : पीले फूल में इत्र लगाकर अर्पण करें
{ वैवाहिक व कानूनी मामलों में सफलता के लिए : हल्दी एवं केसर चढ़ाएं
{ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए : गुड़ से निर्मित खीर व हलवा का भोग लगाएं
{ सौंदर्य व निरोग काया के लिए : माखन एवं दूध से बनी वस्तु का भोग लगाएं

इन मंत्रों का करें पाठ और जाप
{ पाठ : गोपाल सहस्त्रनाम, विष्णु सहस्त्रनाम
{ मंत्र : श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव… ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:

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