झारखंड के इस गांव में दीवारों पर होती है पढ़ाई, एक टीचर की पहल के अधिकारी से लेकर सीएम हेमंत सोरेन तक कायल

ये तस्वीरें दुमका के जरमुंडी ब्लॉक के डुमरथर गांव की हैं। कोरोना महामारी के काल में जहां शहरों के बच्चे ऑनलाइन अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, वहीं ग्रामीण भारत के गरीब परिवारों के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा हासिल कर पाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में झारखंड के संताल परगना प्रमंडल के इस हिस्से में एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहां घर की दीवार पर थोड़ी दूरी के साथ कई ब्लैकबोर्ड बना दिये गये हैं, ताकि सोशल डिस्टेंसिग का पालन हो सके। इन्हीं ब्लैकबोर्ड पर छात्र शिक्षक के पढ़ाये पाठ लिखते भी हैं और सवाल के जवाब भी लिख कर देते हैं। तस्वीर में स्कूल शिक्षक डॉ सपन कुमार हाथ में कम्युनिटी लाउड स्पीकर लेकर छात्रों को पढ़ा रहे हैं। खबर के मुताबिक, 200 से ज्यादा छात्र इस विशेष कक्षा में पढ़ने पहुंच रहे हैं। शिक्षक, गांव के अभिभावक की कोशिशों को बधाई।

कोरोना संकट के बीच जब देश भर के स्कूलों में ऑनलाइन क्लास को बढ़ावा दिया जा रहा है, झारखंड के टीचर डॉ सपन कुमार ने महसूस किया कि गांवों में ऑनलाइन क्लास चलाना नामुमकिन नहीं, तो मुश्किल जरूर है. सो उन्होंने तय किया कि बच्चों को ऑनलाइन क्लास और टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क के भरोसे छोड़ने की बजाय अभिभावकों की मदद से बच्चों की पढ़ाई का वैकल्पिक रास्ता तलाशेंगे.

इसलिए जब सारे स्कूल बंद हैं, तो इस टीचर ने खुद ही बच्चों के घर तक जाकर स्कूल लगाना शुरू किया. गांव की दीवारों को ब्लैकबोर्ड में तब्दील कर दिया और एक लाउडस्पीकर के जरिये बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. दुमका जिला की उपायुक्त राजेश्वरी बी ने जरमुंडी ब्लॉक स्थित डुमरथर गांव में चल रहे इस अभिनव प्रयोग के बारे में ट्वीट करके जानकारी दी.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद डॉ सपन कुमार की सराहना की. मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, ‘डॉ सपन कुमार जैसे शिक्षकों एवं अभिवावकों की लगन और कर्मठता कोरोना के इस विकट संक्रमण काल में भी गरीब बच्चों तक शिक्षा पहुंच रही है. सभी को मेरी तरफ से अनेक-अनेक शुभकामनाएं एवं जोहार.’

उपायुक्त ने बताया कि गांव की दीवारों को ब्लैकबोर्ड में तब्दील कर दिया गया है. जरमुंडी प्रखंड के डुमरथर में एक शिक्षक ने बच्चों की शिक्षा रुक न जाये, इसलिए उनके घर जाकर पढ़ाने का निश्चय किया. अभिभावकों और शिक्षकों ने मिलकर तय किया कि उनके बच्चों की पढ़ाई रुकनी चाहिए. उपायुक्त ने लिखा है कि शिक्षकों और अभिभावकों की इस समझदारी ने उन्हें काफी प्रेरित किया है.

उपायुक्त ने कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं. इसमें दिख रहा है कि डॉ सपन कुमार माइक से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. उपायुक्त ने लिखा है कि सोशल मीडिया पर कंटेंट शेयर किया जाता है. यह कंटेंट हर बच्चे तक नहीं पहुंच सकता, क्योंकि सुदूर गांवों में नेटवर्क की समस्या होती है. ऐसे में डॉ सपन कुमार ने शिक्षा के प्रति जो समर्पण दिखाया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है.

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