बिहार के सहरसा में खुलेगा जीविका दीदियों का पहला मखाना उद्योग, 2 करोड़ 33 लाख 91 हजार मंजूर

उद्योग लगाने के लिए दो करोड़ 33 लाख 91 हजार रुपए स्वीकृत किए गए, जीविका का सूबे में पहला मखाना उद्योग सहरसा में खुलेगा

जीविका का सूबे में पहला मखाना उद्योग सहरसा में खुलेगा। मखाना उद्योग लगाने के लिए 2 करोड़ 33 लाख 91 हजार रुपए की स्वीकृति मिली है। सहरसा जीविका महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड के तहत मखाना उद्योग संचालित होगा। जो मखाना का सामान्य सुविधा केन्द्र के रूप में जाना जाएगा। डीएम वैभव चौधरी ने कहा कि मखाना प्रसंस्करण उद्योग में नॉर्मल (सामान्य) किस्म के मखाना की प्रोसेसिंग कर उसे उत्कृष्ट किस्म का बनाया जाएगा। उसकी पैकेजिंग कर ब्रांडिंग की जाएगी।

मखाना से बने गुणवत्तापूर्ण विभिन्न किस्म के उत्पादों को देश के अलावा अंतराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। उत्पाद इस तरह के बनाए जाएंगे जिसकी बाजार में अलग पहचान हो और इसे देखते ही लोग खरीद लें। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक अमित कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सूक्ष्म एवं लघु क्लस्टर विकास योजना के तहत मखाना का सामान्य सुविधा केंद्र स्थापित होगा। जहां नई तकनीक से गुणवत्तापूर्ण मखाना उत्पादन के संबंध में प्रशिक्षण देकर किसानों का कौशलवर्धन किया जाएगा। उत्कृष्ट किस्म के प्रयोगशाला, उच्च तकनीक के मशीनरी और औधोगिक स्तर की पैकेजिंग व्यवस्था की जाएगी। मखाना उत्पादन में बढोत्तरी के लिए डेमोस्ट्रेशन की योजना लाई जाएगी। कच्चे व तैयार माल के भंडारण के लिए डिपो का निर्माण किया जाएगा। गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए डिजाइन केन्द्र की व्यवस्था भी रहेगी। 50 किलो प्रति घंटे के हिसाब से पैकेजिंग की व्यवस्था की जाएगी। शहर से सटे बैजनाथपुर में बियाडा की जमीन पर मखाना प्रसंस्करण उद्योग खोलने की योजना है। डीएम ने कहा कि अगर बियाडा की जमीन उपयुक्त होगी तो वहां ही उद्योग स्थापित किया जाएगा।

मखाना प्रसंस्करण उद्योग के लिए अगर जमीन उपयुक्त नहीं होगा तो दूसरे जगह जमीन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए स्थल जांच करने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों की माने तो लीज पर जीविका की कंपनी ने बियाडा की जो जमीन ली है वह काफी गहराई वाला है और उसमें मिट्टी भरने में ही 50 से 60 लाख रुपए खर्च होने की बात कही जा रही है।

कोसी के अन्य जिले के मखाना की सहरसा में ही होगी पैकेजिंग कोसी क्षेत्र के अन्य जिले सुपौल और मधेपुरा जिले में उत्पादित मखाना की पैकेजिंग भी सहरसा के मखाना प्रसंस्करण उद्योग में होगा। ऐसा होने से सुपौल और मधेपुरा जिले के मखाना को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा। वहां के किसान भी अपनी फसल की उचित कीमत पाकर लाभान्वित होंगे।

सूबे के सात जिले में मखाना का होता अधिक उत्पादन सरकारी सर्वे में देखा जा रहा है कि सूबे के सात जिले सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा और मधुबनी जिले में मखाना की अधिक खेती होती है। इन जिले के किसी भी फसल से 80 प्रतिशत अधिक मुनाफा वाला फसल मखाना है। मखाना का न्यूट्रिशन और मेडिकल वैल्यू भी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल्स की मात्रा है। इसे हेल्दी फूड माना गया है।

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