आखिरकार PM मोदी-अमित शाह ने JNU को बर्बाद कर डाला, यह लोकतंत्र नहीं गुं-डागर्दी है साहेब

जेएनयू के अंदर इतने संख्या में गुं-डे कहाँ से घुसे। कोई भी आम आदमी जब जेएनयू के अंदर जाता है तो उसे गेट के पास रूकना पड़ता है। रजिस्टर में नाम लिखना पड़ता है गार्ड यह भी पूछा जाता है किसे मिलने जा रहा है या जा रही है।

क्या इन गुं-डों की नाम रजिस्टर में लिखा है? अगर नहीं लिखा है तो गार्ड क्या कर रहे थे ? क्या होस्टल के बाहर भी कोई गार्ड नहीं थे ? पुलिस गेट पर खड़ी थी लेकिन योगेंद्र यादव से डी राजा जैसे लोगों पर ह-मला हुई पुलिस देखती रह गई।

योगेंद्र यादव ने लिखा है कि उनके ऊपर तीन बार ह-मला हुआ जो ह-मले किये वो पुलिस के सामने किये लेकिन पुलिस उन्हें अ-रेस्ट क्यों नहीं किया ? जेएनयू के अध्यक्ष सुबह ही एक ट्वीट की थी जिस में पता चल रहा था कि जेएनयू के अंदर सब ठीकठाक नहीं है लेकिन फिर भी पुलिस को प्रशाशन के तरफ से क्यों इन्फॉर्म नहीं किया गया था।

पुलिस को जेएनयू के अंदर जाने में समय लग गई, कहा जा रहा है कि अंदर जाने के लिए परमिशन की जरूरत पड़ती है।पुलिस जामिया के लाइब्रेरी के अंदर बिना परमिशन के जा सकती है लेकिन गुं-डों को ढूंढने के लिए जेएनयू के अंदर नहीं जाती है,इंतज़ार करती है।परमिशन देने में भी लेट क्यों हुई ?

यह भी सामने आ रहा है कि एक व्हाट्सअप में ग्रुप बनाया गया है और उसी ग्रुप के जरिये पूरी प्लानिंग किया गया। क्या पुलिस उस ग्रुप के खिलाफ करवाई कर रही है ? पुलिस के सामने पत्रकारों पर ह-मला हुई, क्या पुलिस ने किसी को अरेस्ट किया है ?

AIIMS के एक डॉक्टर ने लिखा है कि AIIMS के अंदर भी कुछ लोग घुश गए और डॉक्टर और नर्स को ध-मकी देने लगे,कौन है यह लोग ? क्या सच मे ऐसा हुआ है अगर हुआ है तो AIIMS के अंदर जाने के लिए उन्हें परमिशन किसने दिया? क्या AIIMS में भी गार्ड नहीं थे? इसकी जांच होनी चाहिए ।आजतक के एक पत्रकार पर ह-मला हुई, दूसरे पत्रकारों को गुंडे ढूंढ रहे थे लेकिन कई चैनलों ने कल भी अपना रोटी सेकने में लगे हुए थे।

सुशील महापात्रा

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