जेल में बंद कैदियों ने बनियान पर लिखी चिट्ठी, पत्रकारों तक पहुंचाई जेलर के जुर्म की दास्तान

जमुई. बिहार की एक जेल में बंद कुछ कैदियों (Jamui Jail) ने अनोखे अंदाज में बनियान पर चिट्ठी लिखकर जेल के अंदर की को व्यवस्था और अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया है. बनियान पर लिखी गई चिट्ठी कैदियों ने एक जेल से बाहर आए कैदियों के माध्यम से मीडिया के पास पहुंचाया है. बताया जा रहा है कि जेल से बाहर एक कैदी उसी बनियान को पहन कर बाहर आया और फिर अपने परिजन के माध्यम से उसे एक अखबार के दफ्तर तक पहुंचाया. कैदियों की चिट्ठी (Jamui Prisoners Letter) बने इस बनियान पर जेल के अंदर की कुव्यवस्था, संवेदनहीनता और अमानवीय व्यवहार की दास्तान को सुनकर लोग हैरान हैं, जिसकी चर्चा जिले में जोर-शोर से हो रही है.

पूरा मामला जमुई जिले से जुड़ा है. जमुई जेल में बंद कुछ कैदियों द्वारा बनियान पर लिखी गई चिट्ठी में यह बताया गया है जेल में एक्सटर्नल इंक्वायरी की सख्त जरूरत है, खाद्य सामग्रियों में भारी कटौती की जाती है और गुणवत्ता का अभाव है. चिट्ठी में कैदियों ने जेल के अधिकारी को संवेदनहीन बताया है. साफ सफाई के अभाव से लेकर शिकायत करने के लिए कागज-कलम भी उपलब्ध नहीं कराई जाती. रिहाई के वक्त बड़ी तलाशी होती है और शिकायत करने पर मारा-पीटा जाता है. आरोप ये भी है कि जेल अधीक्षक मुलाकात नहीं करते. इंक्वायरी के दौरान भी सभी कैदियों से हालात के बारे में नहीं पूछा जाता.

बताया जा रहा है कि इस पत्र को जेल में बंद कुछ कैदियों ने एक बनियान पर हाथ से लिखा है.  इस बनियान को ही कैदी पहनकर जेल से बाहर निकला था क्योंकि तलाशी सख्त थी. कैदियों द्वारा बनियान पर लिखे गए चिट्ठी पर जेल के व्यवस्था की पोल खुलने के बाद सोमवार को जमुई मंडल कारा के गेट पर वैसा एक परिवार भी मिल गया, जो परेशान था. एक शख्स नरेश यादव ने आरोप लगाया कि उसके पिता जो कि जेल में बंद है उनकी तबीयत खराब है और सदर अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन उनकी इलाज के लिए समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है. सदर अस्पताल के डॉक्टर पटना रेफर तो कर दिए लेकिन अभी तक पटना ले जाने में देरी हो रही है.

इस मामले में जमुई मंडल कारा के अधीक्षक अरुण पासवान से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि क्योंकि अभी मुलाकाती बंद है और जेल के अंदर सख्ती अधिक बढ़ा दी गई है, इस कारण से कुछ कैदियों को परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि इसी दबाव में ही कैदियों के गुट द्वारा यह काम किया गया है. इस मामले की पड़ताल की जा रही है, जेल प्रशासन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं.

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