कमिश्नर की प्रोफेसर बेटी की दादागिरी, कार में थोड़ा सटा गरीब फल वाले का ठेला, सारा पपीता फेंका

PATNA- गरीब फल वाले का ठेला महिला प्रोफेसर की कार में सटा, गुस्से में मैडम ने फेंके सारे पपीते : बचपन में एक कहानी पढ़ी थी, अखबार में नाम यह मामला भी ऐसा ही हो गया। कुल मिलाकर 2000 रुपए में इतनी बड़ी खबर छपी। वीडियो इतना वायरल हुआ। यह किसी के सनकी होने का ईनाम नहीं तो और क्या है? कायदे से ऐसे लोगों को उचित सजा ही दी जानी चाहिए वरना पैसे वाले लोगों से जेल की कीमत भी तय कर लीजिए और जेल भेजने की बजाय जुर्माना लगा दीजिए। जुर्माना किसी अपराध के लिए सजा का विकल्प नहीं हो सकता है। कल्पना कीजिए कि ठेले वाले ने महिला को एक थप्पड़ जड़ दिया होता तो पुलिस कितनी धाराएं लगाती और कितने दिन में उसे जमानत मिलती। और उनकी हड्डी पसली टूट सकती थी सो अलग। उसने यह सब नहीं किया, संयम रखा उसका ईनाम भी तो होना चाहिए। यह किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए कि कोई कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले। मुझे लगता है कि महिलाएं अपने महिला होने का गलत लाभ उठाएं तो उन्हें माफी नहीं मिलनी चाहिए।

मैं कमिश्नर की बेटी, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता… ठेले वाले की जुबानी तैश वाली प्रोफेसर साहिबा की कहानी
मंगलवार को भोपाल में तैश वाली प्रोफेसर साहिबा (Bhopal Women Professor Viral Video Update) का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। फल वाले के ठेले से कार में ठोकर लगने के बाद महिला प्रोफेसर ने तांडव किया था। गरीब फल वाले के ठेले से पपीते फेंक दिया था। साथ ही उसके ठेले को पलट दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल कलेक्टर ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। साथ ही जांच की बात कही थी। महिला के पति ने फल वाले से मिलकर पूरे मामले को रफा दफा कर दिया है।

ठेले वाले का का नाम अशरफ है। वह आयोध्या बाइपास इलाके में तीन जनवरी को पपीता बेचने गया था। प्रोफेसर साहिबा की कार में गलती अशरफ के ठेले से ठोकर लग गई थी। अशरफ ने बताया कि मेरे ठेले से मैडम की गाड़ी में स्क्रैच हो गई थी। मैंने मैडम को बताया कि आपकी गाड़ी में स्क्रैच लग गई है। इसके बाद उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं है। इसके बाद मैं वहां से आगे बढ़ गया। थोड़ी देर बाद मैडम नीचे आती हैं और गुस्से में ठेले पर पपीता फेंकना शुरू कर दिया।

मैंने केस नहीं किया
अशरफ ने बताया कि मैडम जब ठेले से पपीता फेंक रही थीं तो मैंने कहा कि यह क्या आप कर रही हैं। इस पर उन्होंने कहा कि मैं ऐसे ही करती हूं, तुम्हें जो करना है, वो कर लो। मैं कमिश्नर की लड़की हूं और हमारा ठेला पलटा दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बोलना शुरू किया तो मैडम हंगामा कर अपनी गाड़ी लेकर घर चली गईं। स्थानीय लोगों ने कहा कि वह ऐसी ही करती हैं। आप पुलिस में मैडम की शिकायत करो। वहां के लोगों ने ही ठेला पलटते हुए वीडियो बनाया था।

2000 हजार रुपये में हो गया समझौता
ठेले वाले ने बताया कि विवाद की स्थिति में वहां के लोगों ने ही 100 नंबर को फोन किया था। इसके बाद 100 नंबर की टीम वहां पर पहुंच गई। हमने पूरी घटना का उन्हें वीडियो दिखाया, इसके बाद वह हमें थाने ले गए। थाने में टीआई ने पूछा कि क्या करना है। इस पर हमने कहा कि हम गरीब आदमी हैं। हमें जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हो जाए। इसके बाद पुलिस स्टेशन में महिला के पति पहुंच गए। उन्होंने पूछा कि कितने का नुकसान हुआ है। उन्हें मैंने राशि बताई तो उन्होंने दो हजार रुपये मुझे दे दिया।

इसके बाद महिला प्रोफेसर के पति ने पूछा कि शिकायत करनी है क्या, तो मैंने कहा कि मुझे कोई शिकायत नहीं करनी है। ठेले वाले ने कहा कि मैं कोई कार्रवाई नहीं चाहता हूं। सिर्फ लोगों से इतना कहना चाहता हूं कि गरीब आदमी होने का मतलब यह नहीं है कि आप परेशान करो।

महिला प्रोफेसर ने भी दी सफाई
वहीं, महिला प्रोफेसर चित्रलेखा तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि टक्कर मारने के बाद मैंने ठेला रोका तो उसने नहीं सुना। मैंने जब नीचे जाकर देखा तो गाड़ी की लाइट टूटी थी। फल वाले को मैंने रुकने के लिए कहा तो उसने कहा कि मेरे ठेले में आप टक्कर मार दो। इस बीच कुछ और लोग वहां पहुंच गए। उनलोगों ने मेरे साथ बदसलूकी की है। इसके बाद गुस्से में मैंने फल फेंक दिए। कुछ लोगों ने घर के पास हंगामा भी किया है।

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