बिहार विधानसभा चुनाव को कन्हैया कुमार ने बनाया दिलचस्प, खतरे में CM नीतीश की कुर्सी

कन्हैया की सभा ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को बड़ा ही दिलचस्प बना दिया है । बिहार के सारे मान्य समीकरण आने वाले विधानसभा चुनाव में दरक जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

कल कन्हैया का दरभंगा जिले में तीन सभा हुई है सभा में मौजूद पत्रकारों कि माने तो हाल के वर्षो में वाजपेयी ,आडवाणी और नरेन्द्र मोदी के बाद अगर किसी के सभा में भीड़ जूटा है तो वो कन्हैया का सभा है।सभा के मिजाज कि बात करे तो 2014 में मोदी की सभा में जिस तरीके का जोश दिख रहा था कुछ ऐसा ही जोश और आक्रमकता कन्हैया के सभा में भी देखने को मिल रही है ये अलग बात है कि कोशिश के बावजूद भी कन्हैया के सभा में गैर मुस्लिम कि भागीदारी नहीं के बराबर है लेकिन जिस तरीके से मुस्लिम लड़कियाँ और महिलाओ में कन्हैया को लेकर जो दिवानगी और सम्मान देखने को मिल रहा है वो मुस्लिम समाज में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं।

भीड़ का मिजाज कह रहा है कि मुस्लिम वोटर राजद और जद यू के हाथों से निकल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी और यही वजह है कि बिहार सरकार कन्हैया की सभा में कोई बवेला ना मचे इसके लिए राज्य के सभी एसपी को कन्हैया और उसके सभा स्थल के आसपास कोई हंगामा ना हो इसके लिए प्रयाप्त सुरक्षा बल तैनात करने का निर्देश है ।

कन्हैया मजबूती का बिहार पर क्या असर पड़ेगा इसकी राजनीत को भी समझ लेते हैं नीतीश मदद इसलिए कर रहे हैं कि ताकि राजद का एमवाई समीकरण टूटे क्यों कि बेगूसराय चुनाव में राजद के मुस्लिम उम्मीदवार के बावजूद कन्हैया जिस तरीके से मुस्लिम वोटर को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहा था और फिर सीएए और एनआरसी के आन्दोलन के सहारे कन्हैया बिहार में भी मुस्लिमों के बीच ये छवि बनाने में कामयाब हो गया है कि मोदी को कन्हैया ही जवाब दे सकता है और इसका लाभ कन्हैया को मिल रहा है ।

कल दरभंगा के अलीनगर में इसका सभा था अब्दुलबारी सिद्धकी यहाँ से लगातार विधायक बन रहे है लेकिन जिस तरीके से मुस्लिम समाज कन्हैया के साथ खड़ा था सिद्धकी समर्थको को दिन में तारे दिख रहा था ।

वही दूसरी और नीतीश मुस्लिम समुदाय के विरोध और कन्हैया की रैली के सहारे बीजेपी पर भी दवाब बनाये रखना चाहते है । लेकिन जिस तरीके से रैली में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है जद यू के लिए भी समस्या खड़ी होगी ये भी साफ दिख रहा है और इन सबसे इतर जिस तरीके से कन्हैया लम्बे अन्तराल के बाद पहला ऐसा स्वर्ण नेता है जिसके पीछे मुस्लिम समाज खड़ा है और इस आधार वोट के सहारे जिस तरीके से दलित ,अति पिछड़ा और गरीब स्वर्ण को जोड़ने कि कोशिश चल रही है इसमें थोड़ी भी सफलता कन्हैया को मिल गयी तो फिर 2020 का विधानसभा चुनाव का परिणाम चौकाने वाला हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

-संतोष सिंह, संपादक कशिश न्यूज़

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