कार्तिक पूर्णिमा आज, गंगा घाट स्नान करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा का शैव और वैष्णव, दोनों ही सम्प्रदायों में बराबर महत्व है। इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी हुआ था अतः इसको प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार को है। इसी दिन गुरु नानक जयन्ती भी है।इस दिन भगवान विष्णु का व्रत, दान व पूजन का विधान है। कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान एवं तीर्थ स्थान पर स्नान दान का बड़ा महत्व है। आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और गंगा स्नान कर दान करने से अनन्त पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक महत्व: स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु का प्रथम मत्स्यावतार हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था। गज की करुणामई पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने ग्राह का संहार कर भक्त की रक्षा की थी। यही नहीं, भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही त्रिपुरासुर का वध किया था।

क्या है दीप दान का महत्व : इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा पर दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन दान करने से ग्रहों की समस्या को दूर किया जा सकता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर को है।

किस प्रकार करें स्नान और दान? : प्रातः काल स्नान के पूर्व संकल्प लें, फिर नियम और तरीके से स्नान करें, स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें, साफ वस्त्र या सफेद वस्त्र धारण करें और फिर मंत्र जाप करें, मंत्र जाप के पश्चात अपनी आवश्यकतानुसार दान करें, चाहें तो इस दिन जल और फल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं,

कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त : कार्तिक पूर्णिमा की तिथि- 12 नवंबर 2019, पूर्णिमा तिथि आरंभ- 11 नवंबर 2019 को शाम 6 बजकर 2 मिनट से आरंभ, पूर्णिमा तिथि समाप्त- 12 नवंबर 2019 को शाम 7 बजकर 4 मिनट तक

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *