झारखंड में हार के लिए JDU ने BJP को ठहराया जिम्मेदार, कहा- रघुवर सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ काम किया

जनता दल युनाइटेड (JDU) ने झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार के लिए सीधे-सीधे उसे ही जिम्मेदार बताया है. JDU ने साफ कहा है कि रघुवर सरकार की आदिवासियों के खिलाफ नीति और राज्य में गठबंधन न करना हार की मुख्य वजह हैं. JDU के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि इस हार से BJP को सबक लेना चाहिए. ये BJP की लगातार पांचवी हार है. त्यागी ने याद दिलाया कि एक आदिवासी राज्य में जिसका जन्म आदिवासियों की पहचान और उनकी उत्थान के लिए हुआ था, वहां बीजेपी ने एक गैर आदिवासी को सीएम बनाकर बड़ी भूल की. उससे ज्यादा छोटा नागपुर टेनेसी एक्ट में बदलाव कर बीजेपी ने भारी भूल की. रघुवर दास लगतार सुपर सीएम की तरह व्यवहार करने लगे थे, अपनी राजनीति विरोधियों को वे दुशमन समझने लगे थे. सरयू राय जैसे नेताओं को अपना पसर्नल दुश्मन मान बैठे.

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यह पूछे जाने पर कि क्या झारखंड चुनाव परिणाम का असर आगे आने वाले बिहार चुनाव पर पड़ेगा. त्यागी ने साफ किया कि बिहार में नीतीश की सरकार है और अच्छा काम कर रही है. यहां BJP और JDU के नेताओं के सबन्ध मधुर हैं. नीतीश कुमार एक मजबूत नेता हैं. उनका बीजेपी नेताओं के साथ व्यक्तिगत सबन्ध है. झारखण्ड में हार से ये सबक लिया जा सकता है कि NDA को मजबूत किया जाए और गठबंधन के नेताओं का सम्मान किया जाए.

उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र और फिर झारखंड, इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद NDA के अस्तित्व पर ही सवाल उठना शुरू हो गया है. महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम के बाद NDA अपनी सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना को खो बैठी. झारखण्ड चुनाव से पहले आजसू ने सीट बंटवारे के मुद्दे पर NDA से नाता तोड़ लिया. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और JDU झारखण्ड में पहले से ही NDA गठबंधन से बाहर है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या NDA में चीजें बदतर होने लगी हैं.

उन्होंने कहा कि JDU और अकाली दल लगातार NDA में समन्वय और संवादहीनता का सवाल उठाती रही है. छह साल बीत जाने के बाबजूद इस मुद्दे पर BJP ने ध्यान नहीं दिया है. सवाल BJP के हाईकमान के काम करने के तरीके को लेकर भी उठ रहे हैं. नागरिकता कानून (CAA) और एनआरसी कानून (NRC) पर JDU सवाल खड़े कर चुकी है. JDU के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने साफ साफ कहा है कि NRC को बिहार में लागू करने का सवाल ही नहीं उठता. गौरतलब है कि नागरिकता कानून को जेडीयू ने संसद में समर्थन दिया था. झारखण्ड में चुनाव परिणाम ने एक बार फिर DJU को बोलने का मौका दे दिया.

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