इंटरव्यू के दौराना यूपी के डिप्टी सीएम को आया गुस्सा, पहले माइक फेका, फिर वीडियो डिलीट करवाया

PATNA-बीबीसी के सवालों से गुस्साए यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने इंटरव्यू बीच में ही छोड़ा. माइक निकाल कर फेंक दिया और दावा है कि रिपोर्टर का मास्क खींचकर कैमरे से इंटरव्यू भी डिलीट करवाया जिसे बाद में रिकवर किया गया. इंटरव्यू रोकने, वीडियो डिलीट कराने के बारे में आप आगे पढ़ेंगे, हालाँकि कुछ समय बाद उप-मुख्यमंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने “लड़ने से पहले ही हार मान ली है.” उत्तर प्रदेश चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद बीबीसी के रिपोर्टर अनंत झणाणे ने उप-मुख्यमंत्री से कई मुद्दों पर बात की. पिछले दिनों हरिद्वार में हुए धर्म संसद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ दिए गए बयानों पर सवाल पूछे जाने पर केशव प्रसाद मौर्य नाराज़ हो गए और इंटरव्यू रोक दिया.

बातचीत का सिलसिला इस सवाल से शुरू हुआ कि जब केपी मौर्य से पूछा गया कि दूसरी पार्टियों के पास इतना पैसा नहीं है कि वो बीजेपी की तरह वर्चुअली चुनाव लड़ पाएँ, सपा नेता अखिलेश यादव ने माँग की है कि चुनाव आयोग उनको पैसे दे.

इसके जवाब में मौर्य ने कहा, “मुझे लगता है कि अखिलेश यादव जी ने आज साहस का परिचय दिया है. 2017 की तरह 2022 में समाजवादी पार्टी की पराजय तय है. जनता किसी भी क़ीमत पर गुंडाराज, दंगा राज, माफ़िया राज, भ्रष्टाचार करने वालों को स्वीकार नहीं करना चाहती है. हार तो उनकी तय थी. उन्होंने आज साहस दिखाया है कि आज तिथि की घोषणा होते ही उन्होंने हार स्वीकार कर लिया, उनको इसलिए मैं धन्यवाद देता हूँ.”

जब उनसे पूछा गया कि भाजपा अपने प्रचार में जब माफ़िया के ख़िलाफ़ करवाई का ज़िक्र करती है तो वो सिर्फ़ अतीक अहमद, मुख़्तार अंसारी और आज़म खान का नाम क्यों लेती है,और विकास दुबे का नाम नहीं लेती?

इसके जवाब में केशव मौर्य ने कहा, “जिसके नाम से आम आदमी डरता हो, वो व्यक्ति कौन है? जो इस समय राजनीति के अंदर अपराधीकरण के साक्षात स्वरूप हैं, जिनका नाम आप ले रहे हैं. पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई उसमें विकास दुबे मारे गए. वो घटना थी और उसका जवाब पुलिस वालों ने दिया.”

योगी आदित्यनाथ के मथुरा से चुनाव लड़ने पर कयास लगाए जा रहे हैं, ऐसे में उप-मुख्यमंत्री कहाँ से चुनाव लडेंगे, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,

“आदरणीय योगी जी हमारे मुख्यमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में हम लोगों ने बहुत शानदार काम किया है, इसलिए हम विकास के फ़ील्ड पर सम्पूर्ण विपक्ष को लाना चाहते हैं, और इस फ़ील्ड से भी विपक्ष भाग रहा है. जनता के सामने मुँह दिखाने लायक नहीं है जनता को सब याद है. भूलने भी नहीं देंगे.”

जब उनसे पूछा गया कि हरिद्वार में धर्म संसद में मंच से दिए गए हिंसा भड़काने वाले बयानों के बाद सूबे के मुख्यमंत्री चुप रहते हैं तो ऐसे बयान देने वालों को और बढ़ावा मिलता है और उनके हौसले और बढ़ते हैं. क्या आप लोगों को बयान देकर लोगों को आश्वस्त नहीं करना चाहिए कि आप किसी धर्म विशेष के ख़िलाफ़ नहीं हैं?

केशव प्रसाद केशव प्रसाद मौर्य ने इसके जवाब में कहा, “भाजपा को प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं है. हम सबका साथ सबका विकास करने में विश्वास रखते हैं. धर्माचार्यों को अपनी बात अपने मंच से कहने का अधिकार होता है. आप हिन्दू धर्माचार्यों की ही बात क्यों करते हो? बाकी धर्माचार्यों के बारे में क्या क्या बयान दिए गए हैं. उनकी बात क्यों नहीं करते हो.

जम्मू-कश्मीर से 370 हटने के पहले वहां से कितने लोगों को पलायन करना पड़ा, इसकी बात क्यों नहीं करते हो? आप जब सवाल उठाओ तो फिर सवाल सिर्फ़ एक तरफ़ के नहीं होने चाहिए, धर्म संसद भाजपा की नहीं है, वो संतों की होती है. संत अपनी बैठक में क्या कहते हैं, क्या नहीं कहते हैं, यह उनका विषय है.”

जब उप-मुख्यमंत्री मौर्य से पूछा गया कि यति नरसिंहानंद गाज़ियाबाद के हैं, अन्नपूर्णा अलीगढ़ की हैं, ये लोग जिस तरीके का माहौल बना रहे हैं उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

इसके जवाब में मौर्य ने कहा, “कोई माहौल बनाने की कोशिश नहीं करते हैं, जो सही बात होती है, जो उचित बात होती है, जो उनके प्लेटफ़ॉर्म में उनको उचित लगती है, वो कहते होंगे, आप ऐसे सवाल लेकर आ रहे हैं जो राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हुए नहीं हैं. उन चीज़ों को मैंने देखा भी नहीं है जिस विषय की आप मुझसे चर्चा कर रहे हैं लेकिन जब धर्माचार्यों की बात करो, तो धर्माचार्य केवल हिन्दू धर्माचार्य नहीं होते हैं, मुस्लिम धर्माचार्य भी होते हैं, ईसाई धर्माचार्य भी होते हैं. और कौन-कौन क्या बातें कर रहा है उन चारों बातों को एकत्र करके सवाल करिए. मैं हर सवाल का जवाब दूंगा. आप विषय पहले बताते तो मैं तैयारी करके आपको जवाब देता.”

जब उन्हें भारत-पाक क्रिकेट मैच जैसे मामलों में राजद्रोह लगाए जाने की मिसाल याद दिलाई गई तो उन्होंने सवाल ख़त्म होने से पहले ही कहा, “राष्ट्रद्रोह अलग विषय है, आप राष्ट्रद्रोह को और जो लोगों के मौलिक अधिकार हैं, उससे मत जोड़िए. भारत में रहकर अगर कोई पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाएगा तो नहीं सहन किया जाएगा. वो निश्चित तौर पर देशद्रोही की श्रेणी में आएगा. उसके खिलाफ़ ज़रूर करवाई की जाएगी. लेकिन यह जो धर्म संसद होती है सभी धर्माचार्यों की होती है, सभी संप्रदाय की होती है, सबकी होती है. उनको जो अपनी बात कहनी है वो कहते हैं.”

तक़रीबन दस मिनट तक सवालों के जवाब देने के बाद जब उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बीबीसी के रिपोर्टर से कहा कि वे केवल चुनाव के बारे में सवाल पूछें.

बीबीसी के रिपोर्टर अनंत झणाणे ने कहा कि यह मामला चुनाव से जुड़ा हुआ है, इस पर उप-मुख्यमंत्री भड़क गए और उन्होंने रिपोर्टर से कहा कि आप पत्रकार की तरह नहीं, बल्कि किसी के “एजेंट” की तरह बात कर रहे हैं, इसके बाद उन्होंने अपनी जैकेट पर लगा माइक हटा दिया. उन्होंने बातचीत वहीं रोक दी और कैमरा बंद करने के लिए कहा. उसके बाद उन्होंने बीबीसी रिपोर्टर का कोविड मास्क खींचा और सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर जबरन वीडियो डिलीट करा दिया.

कैमरामैन ने डिलीट कर दिए गए वीडियो को रिकवर करने में कामयाबी हासिल की, दोनों कैमरों से वीडियो डिलीट हो चुका है इसकी तसल्ली केपी मौर्य के सुरक्षाकर्मियों ने कर ली थी, लेकिन कैमरे के चिप से वीडियो को रिकवर किया जा सका है.

यहाँ बीबीसी ने केशव प्रसाद मौर्य के साथ बातचीत के वीडियो को बिना एडिट किए जारी किया है, यानी वीडियो में कुछ जोड़ा या उसमें से कुछ हटाया नहीं गया है. जिस घटनाक्रम का ज़िक्र ऊपर किया गया है वह कैमरा बंद होने के बाद का है इसलिए उसका फ़ुटेज मौजूद नहीं है, आप देख सकते हैं कि उप-मुख्यमंत्री जैकेट में लगा माइक हटा रहे हैं उसके बाद कैमरा बंद हो गया था.

बीबीसी ने इस घटना पर गंभीर एतराज़ ज़ाहिर करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री को आधिकारिक तौर पर एक शिकायत भेजी है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. INPUT-BBC HINDI

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