कोटो में फंसे बिहारी छात्रों का आंदोलन शुरू, 1 दिन का उपवास रख CM नीतीश के फैसले का किया विरोध

कोटा में बिहार की लड़कियों ने एक दिन का उपवास किया है। बिहार सरकार इन्हें वापस न बुलाने पर अड़ी है। जबकि कोई सरकारें अपने छात्रों को ले गईं। बिहार सरकार को एक बार सोचना चाहिए। बिहार के मज़दूरों के लिए भी सोचना चाहिए। उन्हें गाँव घर तक पहुँचाना चाहिए था। हमें नहीं पता कि इन बच्चों के माता पिता पैदल आ रहे मज़दूरों के प्रति कितनी हमदर्दी रखते हैं लेकिन ये तो बच्चों हैं। पंद्रह सोलह साल के बच्चे। बीजेपी विधायक अपने बेटे को ले गए। सस्पेंड ही डी ओ लेवल का अधिकारी हो गया। ज़िलाधिकारी को नहीं पता था क्या ?

नीतीश अंकल, कोटा में बाजार बंद हैं, मेस बंद हाे गए अब खाना पर भी संकट, प्लीज हमें बिहार बुला लो : प्लीज, मुझे भी मुजफ्फरपुर बुला लीजिए। शहर के गाेला बांध राेड निवासी संजय कुमार की पुत्री श्रेया ने कुछ इसी तरह की परेशानी दैनिक भास्कर से मंगलवार काे बातचीत में बताई। श्रेया काेटा में मेडिकल की तैयारी कर रही है। श्रेया ने अपने मामा सुमन भारती से भी माेबाइल पर संपर्क कर मुजफ्फरपुर जल्द बुलाने की गुहार लगाई।

वहीं, न्यू पुलिस लाइन की प्रगति ने बताया कि तीन दिन पहले ही यूपी व उत्तराखंड के बच्चे निकल गए। मध्य प्रदेश के भी बच्चे बुधवार काे निकल रहे हैं। मेरे हाॅस्टल में बिहार की 14 छात्राएं हैं। अब यहां रहने में परेशानी हाे रही है। इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे अखाड़ाघाट के मनीष कुमार ने कहा कि यहां अब रहने में कई तरह की परेशानी हाे रही है। हाॅस्टल के ज्यादातर साथी निकल गए।

पूर्व पार्षद बाेले- मैं अपनी बेटी काे ले अाया, सरकार बाकी बच्चों काे लाने का इंतजाम करे : पूर्व पार्षद विजय झा डीएम के अादेश पर लाॅकडाउन में बेटी व उसकी साथी काे लेकर शहर पहुंचे। मंगलवार काे कई ग्रुप में वार्ड पार्षद द्वारा बेटी काे काेटा से लेकर आने काे मुद्दा बनाया गया। पूर्व पार्षद का कहना है कि 11 अप्रैल काे डीएम का अादेश मिलने के बाद हम अपनी बेटी काे लेकर आए। सरकार बाकी बच्चाें काे भी काेटा से लाने की व्यवस्था करे।

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