बेसहारा कुत्तों को सहारा देने के लिए राकेश शुक्ला ने बेच दी अपनी 20 गाड़ियां और तीन घर

कहते हैं परोपकार करने से पुण्य मिलता है और पर पीड़ा से पाप लगता है। फिर चाहे वह परोपकार इंसानों के साथ जानवरों पर किया जाए या फिर परपीड़ा इंसानों के साथ जानवरों को भी दि। पाप और पुण्य जिस प्रकार के कर्म किए जाएंगे उस प्रकार से ही दिए जाएंगे। भारत में पशु प्रेमियों की कमी नहीं है। भारत के किसी ना किसी कोने में आपको कोई ना कोई पशु प्रेमी दिखाई देगा ही। ऐसे ही एक पशु प्रेमी का जिक्र हम इस लेख में करने जा रहे हैं।

हम जिस शख्स का जिक्र कर रहे हैं उस शख्स का नाम है राकेश। राकेश की उम्र 28 वर्ष की है। दरअसल राकेश ने स्ट्रे डॉग्स यानी आवारा कुत्तों को पालने का और उन्हें बचाने का बीड़ा उठाया है और साल 2009 से वे अनाथ और आवारा कुत्तों को रेस्क्यू कर उनको नया जीवन देने का कार्य कर रहे हैं। वैसे तो पेशे से राकेश एक आईटी इंजीनियर है। राकेश की स्वयं की एक आईटी फर्म है। परंतु राकेश को जिस चीज में सबसे ज्यादा रुचि है वह है बेसहारा जानवरों को सहारा देना।

राकेश ने बेसहारा कुत्तों के लिए बाकायदा एक फार्म तैयार किया है। राकेश ने अपने इस फार्म को विशेष रुप से जानवरों के लिए सुविधाजनक हो ऐसा डिजाइन किया है। राकेश के फार्म में करीब 800 कुत्ते हैं, 10 गाय है और साथ में घोड़े भी है। राकेश ने इस फार्म को खड़ा करने के लिए काफी मेहनत की और पैसा भी खूब भाया। राकेश ने इस फार्म को खड़ा करने के लिए अपनी 20 से भी ज्यादा गाड़ियां और तीन घर बेच दिए। राकेश के इस फार्म को चलाने के लिए प्रतिमाह 15 लाख रुपए खर्च आता है। इसमें से 90% खर्च राकेश खुद की आईटी फर्म से ही आने वाले उत्पन्न से उठाते हैं।

राकेश को बेसहारा कुत्तों को सहारा देने की प्रेरणा जिस घटना से मिली वह बहुत दिलचस्प है। दरअसल राकेश अपने घर पर एक 45 दिन का छोटा गोल्डन रोटरीवर फीमेल कुत्ता अपने घर ले आए। 1 दिन राकेश अपने कुत्ते के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले। तभी एक जगह पर उन्हें सड़क के किनारे एक छोटा कुत्ते का बच्चा ठिठुरता हुआ दिखाई दिया। राकेश उसे उठाकर अपने साथ अपने घर ले आए।

यहीं से राकेश ने दूसरे भी बेसहारा कुत्तों को रेस्क्यू करने का काम चालू कर दिया। इस बात के लिए उनकी पत्नी उनसे बहुत नाराज हुआ करती थी प्रणाम फिर बाद में राकेश ने जमीन खरीदकर कुत्तों के लिए स्पेशल फार्म डिजाइन कर लिया। राकेश ने आगे चलकर फिर अपनी एक संस्था बनाई जिसे राकेश ने वॉइस ऑफ स्ट्रे डॉग्स का नाम दिया। बेसहारा कुत्तों को सहारा देने के अपने इस परोपकारी कार्य के चलते राकेश का नाम ‘डॉग फादर’ पड़ गया और राकेश इसी नाम से मशहूर हो गए। राकेश हर उस पशु प्रेमी के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में उभरे हैं जिनके मन में पशुओं के लिए बहुत अधिक संवेदनाएं हैं।

डेली बिहार न्यूज फेसबुक ग्रुप को ज्वाइन करने के लिए लिंक पर क्लिक करें….DAILY BIHAR  आप हमे फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और ह्वाटसअप पर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *