आज फिर श्रीनगर लाल चौक पर तिरंगा फहराते देखा, अपने वतन की शान देखी

आज एक बार फिर श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराते देखा। अपने वतन की शान देखी। अपना दिल गदगद है। लाल चौक पर तिरंगा क्यों न फहराए,यह वह पहली महत्वपूर्ण आकांक्षा थी जिसने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जनसंघ बनाने को विवश किया था।नई पीढ़ी को बताता चलूँ कि वही पुरानी जनसंघ आज की भारतीय जनता पार्टी है। श्याम प्रसाद के देश भर में फैले उनके अनुयाइयों ने अपने दिलों में इस चाह की ज्योति को सदैव जलाए रखा।

इस चाहत को कभी मलिन नहीं होने दिया।इस चाहत को पार्टी के सदस्य कभी नहीं भूले,अपने संकल्प को कभी डिगने नहीं दिया। 72 साल से ज्यादा दिनों तक धैर्यपूर्वक इंतजार किया।और आज श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा शान से लहरा रहा था। वो जो कश्मीरी नेता कहा करते थे कि हिम्मत हो तो लाल चौक पर तिरंगा फहरा कर दिखाओ,न जाने आज कहां मुंह छुपाये बैठे हैं।पूरे कश्मीर में तिरंगा का विरोध करने एक भी कश्मीरी घर से बाहर सड़क पर नहीं निकला। सिगड़ी से गर्मी लेता हुआ आम कश्मीरी अपने घरों में टीवी पर स्वाधीनता दिवस समारोह के कार्यक्रमों का आनंद लेता रहा।


राम

कसम मुफ़्ती साहब की बिटिया महबूबा इस मौके पर बहुत याद आ रही हैं।वही थीं जो गला फाड़ कर बताया करती थीं कि अगर धारा 370 और 35 ए को हटाया तो पूरी घाटी में खून की नदियां बह जाएगी।तिरंगा को कोई कंधा देने वाला नहीं मिलेगा।अगर महबूबा इस मौके पर विरोध करने अपने दर्जन भर साथियों के साथ अपने घर से बाहर निकल आतीं तो कम से कम अपन तो मान लेते कि हमारे विरुद्ध की विचार धारा मानने वाला कम से कम संकल्प के मामले में हमारी ही तरह का धनी है।

पर धारा 370 और 35 ए के पक्षधरों में कोई भी सड़क पर खुलेआम तिरंगे के विरोध का साहस नहीं जुटा पाया। सो देशवासियों एक चीज तो स्पष्ट है कि नेहरू और कांग्रेस की मेहरबानी से धारा 370 और 35 ए के रूप में इन्हें शेर की खाल दे दी गई थी।जिसे ओढ़ कर ये गीदड़ शेर सरीखी दहाड़ें मारा करते थे।खाल हटी और इनका वास्तविक रूप पूरे देश के सामने हैं,सारे गीदड़ अपनी मांद की पनाह में हैं।अब इंतजार शाम का है जब गीदड़ भभकी देने वाले वीर टीवी चैनलों पर कश्मीरी दलों के नुमाइंदे बने दहाड़ने वाली मुद्रा में दिखाई देंगे। दिन में भले ही सड़कों पर नारेबाजी की हिम्मत न जुटा सके हों पर रात में ये तमाम प्रवक्ता टीवी स्टूडियो की ऐ सी की गर्मी में गरमा गरम बहस का नजारा जरूर कराएंगे।

हमारे लिए आज का दृश्य यह सबक भी दे गया कि कश्मीर के बंटवारे और केंद्र शासित प्रदेश बनाये रखने की नीति का परित्याग एक भारी गलती होगी।सो केंद्रीय गृहमंत्री इस बाबत आश्वासन देने की भूल न करें।
आज लाल चौक पर तिरंगा फहराने पर कुछ इस्लाम परस्त तथाकथित सेकुलरवादियों का ट्वीट जरूर आएगा । इनमें बरखा दत्त,सबा, राणा अय्यूब सरीखों का रुदन झलकेगा।कुछ झूठी बातों को सच सरीखा बना कर पेश भी किया जाएगा, घाटी की फलां गली में जन सैलाब उमड़ा भी था पर क्या करें टीवी कैमरा वहां तक नही पहुंचा।इस प्रकार के सफेद झूठ दिल्ली में बैठे ये वीर बताएंगे।मानों सबों को महाभारत वाले संजय की दिव्य दृष्टि हासिल हो। सोच रहा हूँ कि जब लाल चौक पर तिरंगा को फहराया जा रहा था तब बरखा क्या कर रही होंगी। इन धाराओं के बल पर रोजी-रोटी कमाने वाले अपने मुसलमान पति,जो बेचारे कभी पीडीपी के विधायक होते थे,के आंसू पोछ रही होंगी या ढाढस बंधा रही होंगी कि घबराओ नहीं जब मोदी का पतन होगा और मौनी बाबा सरीखा हमारा अपना प्रधानमंत्री आएगा तो कश्मीर घाटी में उल्टी गंगा बहेगी और वही पुराना दौर वापस लौट आएगा।

इसी को गालिब कह गए हैं कि “दिल बहलाने को गालिब ख्याल अच्छा है।” ऐसा नहीं है कि लाल चौक में हुए झंडातोलन का वामपंथी विरोध नहीं करेंगे। सड़कों पर विरोध को निकलने पर जनता के हाथों पिटने का खतरा है।सो जेएनयू के गंगा ढाबे पर चाय-काफी के प्यालों से गर्मी लेते हुए मोदी से लेकर आरएसएस तक को दिल खोल कर गरियाएँगे और फिर अपने अपने कमरों में रजाई की शरण में चले जायेंगे। हिंदुस्तान में इसी को वामपंथी कहते हैं।
ईमानदारी की बात है कि लाल चौक में दिखा आज का नजारा दिल को गदगद कर गया है।सो भाई आज हम किसी भी विरोधी की किसी भी गाली का बुरा नहीं मानेंगे। सो विरोधियों को पहले ही यह बता दे रहे हैं ताकि गाली देते वक्त वे कोई परहेज न करें।उन तमाम लोगों को जो लाल चौक पर तिरंगा देखने के बरसों से ख्वाहिशमंद थे,मेरी तरफ से हार्दिक बधाई। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

राजन किशोर झा

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