RCP देंगे इस्तीफा, ललन सिंह या उपेंद्र कुशवाहा बनेंगे मोदी सरकार में नए मंत्री, ​चर्चा तेज

PATNA- अब इतना तो साफ हो गया है कि आरसीपी सिंह का राज्य सभा जाने का सपना अधूरा रह गया है। उनके बदले सीएम नीतीश कुमार ने जदयू से झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष खारू महतो को राज्य सभा का टिकट दिया है। इधर वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी ने दावा किया है। राज्य सभा का टिकट कटने के बाद भी आरसीपी जदयू के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि वह बहुत जल्द मोदी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अब सवाल उठता है कि उनके स्थान पर जदयू कोटे से किसे मोदी सरकार का नया मंत्री बनाया जाता है। चर्चा में दो लोगों का नाम है। पहला ललन सिंह और दूसरा उपेंंद्र कुशवाहा।

सवाल : आरसीपी नहीं, तो जदयू का केंद्रीय मंत्रिमंडल में कौन?ललन बोले- ये पीएम का विशेषाधिकार, वही जवाब दे सकते हैं :
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ ने कहा कि झारखंड में संगठन विस्तार के लिए खीरू महतो जैसे जमीनी व समर्पित कार्यकर्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया। ललन, रविवार को मीडिया से मुखातिब थे। इस सवाल कि ‘अब आरसीपी सिंह नहीं हैं, तो जदयू का केंद्रीय मंत्रिमंडल में कौन होगा’, के जवाब में उन्होंने कहा-’ये सब प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, सिर्फ वही इसका जवाब दे सकते हैं।’ ‘अब क्या जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहेगी’, के जवाब में ललन बोले-’मैंने कहा न कि ये सब काल्पनिक सवाल हैं। इसका जवाब सिर्फ एक व्यक्ति दे सकते हैं-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।’

ललन ने इस लाइन को गलत आकलन बताया कि ‘आरसीपी का पत्ता साफ हो गया।’ कहा-’वे जदयू के बड़े व सम्मानित नेता हैं।’ उन्होंने इस सवाल को सिरे से खारिज किया कि ‘जदयू की खेमेबाजी के चलते आरसीपी बेटिकट हुए?’ ललन ने कहा-’जदयू में सिर्फ एक खेमा है- नीतीश खेमा; एक ही गुट है-नीतीश गुट।’ उन्होंने कहा-’पार्टी ने आरसीपी सिंह को हर स्तर पर सम्मानित करने का काम किया। वे संगठन प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव रहे। अध्यक्ष बने। केंद्र में मंत्री बने। दो बार राज्यसभा गए। … अब एक साधारण गरीब कार्यकर्ता को, जो समता पार्टी के समय से समर्पित रहे हैं, को सम्मान देने की बात हुई। इसमें कोई खास बात नहीं है। इसका अर्थ, अनर्थ निकालने की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा-’आरसीपी सिंह के मंत्री बनने से मैं कभी नाराज नहीं था। काहे की नाराजगी? पार्टी के अंदर कोई फैसला है, तो वह सहर्ष स्वीकार्य होता है।’ यह पूछे जाने पर कि ‘क्या आरसीपी, खुद मंत्री बन गए थे’, ललन ने कहा-’बीती बात को कुरेदने का क्या फायदा? इस चर्चा का कोई मतलब नहीं।’ ‘अब आरसीपी की क्या भूमिका रहेगी,’ के जवाब में ललन ने कहा-’वे बड़े व सम्मानित नेता हैं। .

यह दूसरे प्रदेशों में पार्टी के फैलाव की कवायद : उपेंद्र
जदयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस सवाल को नकारा कि ‘बेटिकट होना, आरसीपी सिंह को बड़ा झटका है और इससे पार्टी में भी स्थितियां बिगड़ सकती हैं?’ उन्होंने कहा-’यह एक सामान्य प्रक्रिया है। राज्यसभा एक ही व्यक्ति को भेजना था। पार्टी ने तय किया। मुख्यमंत्री ने तय किया। जिनका चयन हुआ है, वे पार्टी के पुराने समर्पित कार्यकर्ता हैं। इससे, अन्य प्रदेशों में विस्तार करने का जो हमारा संकल्प है, उसमें हमें मदद मिलेगी। इसको इस रूप में देखना चाहिए। अनिल हेगड़े की उम्मीदवारी भी इसकी गवाही है।

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