मोबाइल-टेलीफोन बिल के आधार पर आसानी से गरीब लोगों को मिलेगा कर्ज, डिजिटल बिल पर कर सकेंगे दावा

कर्ज लेने के लिए बैंक में आमतौर पर सैलरी स्लिप, आयकर दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड मांगे जाते हैं, लेकिन जल्द ही अब टेलीफोन बिल के आधार पर भी बैंक से कर्ज लिया जा सकेगा। देश के निम्न आय-वर्ग के जिन लोगों का कोई कर्ज इतिहास नहीं रहा और जिन्हें छोटे कर्ज की जरूरत है, उन्हें मोबाइल फोन बिल के आधार पर कर्ज देने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। फोन के हर माह के रिचार्ज बिल से ऐसे लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री या कर्ज लेने की क्षमता का आकलन हो सकता है, जिसके आधार पर उन्हें कर्ज लेने में सहूलियत होगी। हाल ही में निम्न आय-वर्ग के ग्राहकों को इस प्रकार की सुविधा दिलाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ एक बैठक बुलाई थी।

डिजिटल बिल के आधार पर कर सकेंगे दावा : ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने बताया कि उपभोक्ताओं की डाटा शेयरिंग और उससे ग्राहकों को मिलने वाले लाभ के मामले में अगस्त के आखिरी सप्ताह में टेलीकॉम कंपनियों के साथ बैठक बुलाई गई थी। शर्मा के मुताबिक डाटा शेयरिंग की सहमति देकर ग्राहक अपना फोन बिल डिजिटल रूप में हासिल कर सकता है जिसके आधार पर ग्राहक कर्ज के लिए भी आवेदन कर सकता है। इस डिजिटल बिल का इस्तेमाल वह बीमा उत्पाद खरीदने के लिए भी कर सकता है। डिजिटल बिल के आधार पर ग्राहक यह दावा कर सकता है कि वह समय पर अपने बिल का भुगतान करता है। कर्ज देने वाली संस्था को इससे ग्राहक की भुगतान करने की क्षमता का भी पता चलेगा।

बिल से पता चलेगा कितना कर रहे खर्च : ट्राई बैठक में यह बात भी सामने रखी गई जो निम्न आय-वर्ग के लोगों की कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है। लेकिन ऐसे ग्राहक भी महीने में एक या दो बार अपने फोन को रिचार्ज कराते हैं। ग्राहक के डिजिटल रिचार्ज बिल से उसकी क्रेडिट हिस्ट्री तैयार होगी। हर महीने के बिल से पता चल जाएगा कि वह पिछले कुछ महीनों से फोन पर कितना खर्च कर पा रहा है। शर्मा के मुताबिक इस काम में ट्राई और आरबीआइ में एक समझौता भी हो रहा है जिसकी मदद से टेलीकॉम कंपनियां अकाउंट एग्रीगेटर (एए) प्रणाली का हिस्सा बन सकेंगी।

आरबीआई करेगा लाइसेंस देने का काम : अकाउंट एग्रीगेटर का काम उपभोक्ताओं का डाटा रखना और ग्राहकों की सहमति से उसे विभिन्न एजेंसियों को मुहैया कराना होगा। हाल ही में नीति आयोग ने डाटा एंपावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर (दीपा) लागू करने की सिफारिश के साथ मसौदा जारी किया है। इसमें कहा गया है कि वित्त, स्वास्थ्य क्षेत्र, टेलीकॉम के साथ ई-कॉमर्स व शहरी क्षेत्र के लिए एए की सुविधा ली जाएगी। एए को लाइसेंस देने का काम आरबीआई करेगा।

मसौदे के मुताबिक नवंबर, 2019 में आरबीआई ने विभिन्न क्षेत्रों में एए तैयार करने की दिशा में जरूरी तकनीक दिशानिर्देश प्रकाशित किया था। तब से आरबीआइ एए के लिए सात लाइसेंस को सैद्धांतिक रूप से अपनी मंजूरी दे चुका है। इनमें से दो को एए के संचालन का लाइसेंस हासिल हो चुका है। विभिन्न क्षेत्रों के लिए एए तैयार करने के उद्देश्य से इस वर्ष जुलाई-अगस्त में एए हैकाथॉन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

इस प्रतियोगिता में 550 से अधिक स्टार्ट-अप्स व फिनटेक कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से चुने गए स्टार्ट-अप्स व फिनटेक को एए का लाइसेंस दिया जा सकता है। नीति आयोग के मुताबिक शहरी निकायों के साथ लोगों के डाटा शेयरिंग के लिए अर्बन डाटा एक्सचेंज का भी निर्माण किया जा सकता है।

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