बिलखते माता-पिता को नहीं मिली नवादा जाने की अनुमति तो वीडियो काॅल से ही देखा बेटी का अंतिम संस्कार

Patna: को/रोना का लॉकडाउन है. लेकिन जरूरी काम रुके भी नहीं है. राज्य सरकार ने अफसरों के विवेक पर छोड़ दिया है कि किसे बाहर जाने की अनुमति दी जाए और किसे नहीं. हमारे अफसर किस संवेदनहीनता से काम कर रहे हैं, इसका उदाहरण शुक्रवार को उस समय देखने को मिला जब माता-पिता को वीडियो कॉल से बेटी के अंतिम दर्शन करना पड़े. इस दौरान चार साल की बेटी भी फूट-फूटकर रोती रही.

नेशनल प्रिंटिंग प्रेस में वेब सेक्शन के इंचार्ज और नामकुम हाईटेंशन काॅलोनी निवासी जितेन्द्र कुमार की बेटी रानी (28) की शादी नवादा (बिहार) में हुई है. कुछ समय से वह बीमार थी. बुधवार देर रात तबीयत बिगड़ी और सुबह तक मौत हो गई. गुरुवार को जितेन्द्र और उनकी पत्नी सुलेखा ने बेटी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी. कुछ लोग उन्हें लेकर डीसी कार्यालय गए, लेकिन वहां बात नहीं बनी. इसके बाद डीटीओ कार्यालय पहुंचे. कर्मचारी ने बताया लाॅकडाउन में दूसरे राज्य की मंजूरी नहीं मिल सकती. यह सुनकर लौट आए. जितेन्द्र ने बताया, बेटी का अंतिम फोन बुधवार रात 12 बजे आया था. रोते हुए कह रही थी कि पापा अब हम नहीं बचेंगे. मां को लेकर आ जाइए.

वीडियो काॅल से ही बेटी का अंतिम संस्कार देखा

रानी की चार वर्षीय बेटी सुहानी नाना जितेन्द्र के पास ही रहती है. जितेन्द्र और उसके परिवार ने मोबाइल पर वीडियो काॅल पर ही रानी के अंतिम दर्शन किए किए. मां की आंख बंद और लेटे हुए देख छोटी बच्ची सुहानी भी जोर-जोर से रोने लगी. घर में उपस्थित लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए.

मंत्री की सिफारिश पर आठ बसों में बैठे सैकड़ों लोगों को दूसरे जिले में जाने की मंजूरी दे दी थी

इन्हीं अफसरों ने चार दिन पहले एक मंत्री की सिफारिश पर आठ बसों में बैठे सैकड़ों लोगों को दूसरे जिले में जाने की मंजूरी दे दी थी. मंत्री आलमगीर आलम की सिफारिश पर रांची डीसी राय महिमापत रे 29 मार्च को आठ बसों को पाकुड़, साहेबगंज, कोडरमा जाने की मंजूरी दी थी. इनमें सैकड़ों लोग सवार थे. मामला गरमाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोकॉज नोटिस जारी किया. डीसी ने कहा था-केंद्र की गाइड लाइन के बाद मंजूरी रद्द कर दी थी. हालांकि तब तक सारी बसें पाकुड़ जा चुकी थी.

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