एक गो बइर तुड़ के देनी, आ हो गइल लभ….ए हमार भगजोगनी, आज वैलेंटाइन डे के दिन तहार बड़ी इयाद आवत बा

जब हम अपने शहर से मोहब्बत करते हैं, तो मोहब्बत में भी तो शहर झलकना चाहिए। अपनी मिट्टी की खुशबू आनी चाहिए। अगर बिहार में भोजपुरी अंदाज में प्रेमपत्र लिखा जाए तो वो कैसा होगा? वैलेंटाइन्स डे पर प्रवीण सप्पू ने ये ‘भोजपुरी ’ खत लिखा है…

ए हमार भगजोगनी, आज वैलेंटाइन डे के दिन फज़ीरे से तहार बड़ी इयाद आवत बा। मन एकदम किचिर मिचिर करत बा। आजुवे के दिन पिछलका बरिस तहरा बाबूजी के दिखावे खातिर हम मुम्बई चल अइनी। ऊ दिन हम कबो ना भुलम जब तहार बाबूजी हमरा के बरहम बाबा के किरिया खियावले रहले कि जब ले कुछ बन ना जाईं तब ले मुंह मत दिखइह।


तहरा के मालूम कि हम अब मुम्बई में नोकरी करे लगनी। एतना बरिस बाद पहिलका भलेंटाइन हवे जऊन तहरा बिना बीती। तहरा के देखे के हमार मन हरमेसा छछनात रहत बा। ए भगजोगनी, जानत बाड़ू, जब तहार इयाद पड़ेला नू त हम उ कुआर के आपन पहिलका मिलान के सोचे लागेनी। कैसे तू कोंनहट्टी पर के बइर तुड़े खातिर ढेला मारत राहलू अउर हम ओहिजा आके तहरा के बोलनी की “ए भगजोगनी, बइर तुड़ दी का’ जब हम तुड़ के देहनी त तू केतना कस के “आई लभ यू मनराखन जी’ चीला के भागल रहलू।

ए जी, तहरा इयाद बा उ भुत्तन बाबा के दुवार पर के अठजाम, कइसे तहार माई हमरा के बोलली कि तनी भगजोगनी के घरे चहुँपा दीं। भर रास्ता तहार कानी अंगूरी में आपन अंगूरी फंसा के हिलावत रहनी अउर तू ओतने लजात राहलू। आजो तहार उ लजाइल चेहरा जब इयाद पड़ेला त मन के भीतर ले हिलोर देला। हम त उ बेरा एकदम लजा गइनी जब तहार छोटकी बहिन केवाड़ी खोल के बोलली ‘का ए जिज्जा”।

उ दिन बा अउर आज के दिन बा, हमार परेम बढ़ते जात बा। मन करत बा कि अभिये छपरा-मुंबई एक्सप्रेस पकड़ के तहरा कोरा में आ जाइ।हमरा ई पाती से भगजोगनी के पता चले कि मनराखन भी तहरा से “आई लभ यू’ करेला।
तहार परेम में पागल
“मनराखन’

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