जब तक पापा को न्याय नहीं मिलेगा खाना नहीं खाएंगे, मधुबनी नरसंहार में परिवार का अनशन शुरू

Santosh singh, editor, kasish news : मधुबनी नरसंहार मामले में एसपी के गैर जिम्मेदाराना रवैये की वजह से एक बार फिर मधुबनी जल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि नरसंहार में मारे गये लोगों के परिजनों का भरोसा पुलिस प्रशासन से उठता जा रहा है और लोगों में आक्रोश भड़कना शुरू हो गया है और यही वजह है कि नरसंहार में मारे गये लोगों के छोटे छोटे बच्चे ,विधवा पत्नी, मां और पिता के साथ साथ गांव के लोग आमरण अनशन पर बैठ गये हैं इससे माहौल बिगड़ने लगा है।


स्थानीय पुलिस प्रशासन पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है क्योंकि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद मधुबनी पुलिस के कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया है जबकि पांच बार सीएम खुद कहते हैं कि डीजीपी से मधुबनी मामले में बातचीत हुई है।

जदयू के विधान पार्षद संजय सिंह और पूर्व मंत्री जयकुमार सिंह और भाजपा कोटे से मंत्री नीरज बबलू जिस दिन पीड़ित परिवार से मिले थे तो पीड़ित परिवार ने कहा था कि बेनीपट्टी पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रहा है ऐसे मेंं मुझे न्याय नहीं मिलेगा ।अभी तक जो भी कार्रवाई हुई है सिर्फ दिखाने के लिए, अभियुक्त अभी भी मुझे धमकी दे रहा है कि जो बचा हुआ है उसे भी छोड़ेंगे नहीं अभी तक कोई भी सीनियर अधिकारी हम लोगों से मिलने नहीं आये हैं और ना ही घटनास्थल का जायजा लिया है आईजी थाने पर ही चले गये यह कह कर कि ये वर्चस्व की लड़ाई कोई नरसंहार नहीं है।
रावण सेना मधुबनी में अवैध शराब का सिंडिकेट चलाता है सारे पुलिस वाले उससे मिले हुए हैं एसपी तक को पैसा देता है ,कुछ मत करिए मुख्यमंत्री साहब से बस एक ही विनती है बेनीपट्टी थाना कांड संख्या 308/20 और 309/20 कि किसी सीनियर अधिकारी से जांच करा दीजिए इस नरसंहार में कैसे पुलिस शामिल है सब कुछ सामने आ जायेगा 309/20 में मेरा बेटा पांच माह से झूठा एससी एसटी केस में जेल में बंद है जबकि बेनीपट्टी पुलिस प्रवीण झा और नवीण झा को बचाने के लिए थाना में बैठ कर झूठा केस तैयार किया ताकी 308/20 मामले ने इन लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो सके।
मेरे बेटे पर कुदाल से हमला हुआ जिसमें पैर कट गया बेटा मेरा अस्पताल में भर्ती था इन लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय थाना प्रभारी और डीएसपी दोनों मिल कर एससी एसटी केस में बिना किसी वरिय पदाधिकारी के सुपरविजन का केस दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर ही अस्पताल से ही मेरे बेटे जो जेल भेज दिया ।


आप लोग आये तो मेरा नीतीश बाबू से बस यही आग्रह है कि इस मामले की जांच करा दे ।जदयू का प्रतिनिधिमंडल पटना लौटने के साथ ही सीएम से मिलकर पीड़ित परिवार की मांग से सीएम को अवगत कराये सीएम ने डीजीपी को इस मुकदमे की जांच कराने का आदेश दिये चार दिन से अधिक हो गया लेकिन अभी तक कोई भी वरिय पदाधिकारी मामले की जांच के लिए नहीं पहुंचा है।


इतना ही नहीं पीड़ित परिवार की कौन कहे मीडिया को भी पता नहीं है कि इस मामले में अभी तक किसकी गिरफ्तारी हुई है और कितनी गिरफ्तारी हुई है मुझे तीन दिन पहले 8 कहा गया जब नामजद के गिरफ्तारी पर सवाल किया गया तो कुछ भी बोलने से को तैयार नहीं हुए ।कल बीबीसी से एसपी ने कहा है कि अभी तक 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई है ये कौन 12 लोग है किसी को भी पता नहीं है ।


ये जानकारी भी सीएम को दी गयी कि एसपी के कार्यशैली से भी लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठता जा रहा है दो दिन पहले एसपी मीडिया से संवाद भी किये लेकिन नरसंहार मामले को लेकर जैसे ही सवाल हुआ उठ कर चल दिये ।


एसपी इतने एरोगेंट क्यों हैं क्या उन्हें लगता है कि मैं सीएम के जिले का हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है इसलिए डीजीपी तक की बात वो नहीं सुन रहे हैं ।एसपी अगर ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें इतिहास के पन्नों को पलटना चाहिए , बिहार है सब कुछ यही होना है लालू सरकार में मलाई खाने वाले अधिकारियों का क्या हाल है 15 वर्षो से वो कहां है उन अधिकारियों के हस्र से ऐसे अधिकारियों को सीख लेनी चाहिए ।वैसे भी इस सरकार को लग जायेगा कि अब उनके दामन पर दाग लग सकता है तो एक से एक प्यारे अधिकारी का वध होते हम लोगों ने देखा है।


ऐसी स्थिति में पुलिस मुख्यालय को सख्त कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि इसका असर पूरे बिहार के कानून व्यवस्था पर पड़ सकता है ।

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