बिहार में महंगा हुआ बालू-गिट्टी, गाँधी सेतु-सिमरिया-दीघा पूल पर बंद हुआ ट्रकों का परिचालन

पटना जिले के तीनों पुल से निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकाें के परिचालन पर राेक लग गई है। सबसे पहले महात्मा गांधी सेतु पर भारी वाहनों के परिचालन पर राेक लगी। इसका जीर्णोद्धार हो रहा है। इसके बाद माेकामा स्थित राजेंद्र सेतु की मरम्मत में भारी वाहनों के परिचालन से परेशानी काे देखते हुए उसपर परिचालन पर रोक 3 दिसंबर 2019 से लग गई। अब शुक्रवार से जेपी सेतु पर भारी वाहनों का परिचालन बंद हो गया है। अब ट्रकों के उत्तर बिहार जाने टके लिए आरा का वीर कुंवर सिंह पुल ही है। हालांकि कोईलवर पुल क्षतिग्रस्त होने से अरवल स्थित पुल से पार कराकर आरा आना पड़ रहा है, जिससे उनकी दूरी 125 किमी बढ़ जा रही है।

पटना से उत्तर बिहार को जोड़ने वाले जेपी सेतु, राजेंद्र सेतु और गांधी सेतु पर ट्रकों की आवाजाही बंद होने से सोनपुर, सीवान, मुजफ्फरपुर, छपरा, गोपालगंज होते हुए पूर्वी उत्तरप्रदेश की तरफ जाने वाले बड़े वाहनों को लगभग 125 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा। ये ट्रक अलवर, सहार, बिक्रमगंज, आरा के पास डबुरा पुल पार कर उत्तर बिहार की तरफ आवाजाही करेंगे। इससे वाहनों पर एक चक्कर में करीब 7 हजार रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। बिहार ट्रक ओनर एसोसिएशन के महासचिव राजेश कुमार का कहना है, सेतु पर ट्रकों की आवाजाही रोकने के बाद ओवरलोडिंग बढ़ेगी। इससे राजस्व की हानि होगी और प्रदूषण भी बढ़ेगा। डीजल का रेट 69 रुपए प्रति लीटर है और लोडेड ट्रक एक लीटर में डेढ़ से दो किलोमीटर ही चलता है। ऐसे में 125 किलोमीटर तय करने में वाहनों पर लगभग 7 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेंगे।

3 दिसंबर 2019 काे राजेंद्र सेतु से भारी वाहनों का परिचालन राेक दिया गया। रेलवे के चीफ इंजीनियर द्वारा जानकारी दी गई कि भारी वाहनों के परिचालन से पुल क्षतिग्रस्त हो रहा है और मरम्मत भी ठीक से नहीं हो पा रही है। इसके बाद डीएम कुमार रवि ने बेगूसराय के डीएम के साथ बैठक कर रोक लगाने का निर्देश दिया।

3 फरवरी तक जेपी सेतु से गुजरने वाले अाेवरलाेड वाहनों से प्रशासन ने एक कराेड़ 11 लाख 20 हजार 500 रुपए वसूला जुर्माना वसूला है। प्रशासन ने आेवरलोडेड ट्रकों पर फाइन कर उसे लौटाने के बजाए पुल पार करा दिया, जिससे स्पैन पर बुरा प्रभाव पड़ा। 20 नवंबर 2019 काे जिला प्रशासन ने जेपी सेतु पर ट्रकाें का परिचालन शुरू करने की अनुमति दी थी। पहले दिन दिन बेली राेड स्थित रूपसपुर नहर की अाेर से जेपी सेतु की अाेर अाने वाले ट्रकाें से 62 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया था।

होली को देखते हुए पटना व्यापारियों की काफी भीड़ है। आसपास के जिलों के साथ ही दूसरे राज्यों से भी खाने-पीने की सामग्री मंगवायी जा रही है। सेतु पर बड़े वाहनों की रोक की वजह से व्यापारी छोटे वाहनों या फिर आरा होते हुए ट्रकों से सामग्री मंगवाएंगे। दोनों स्थिति में आम लोगों पर इसका असर पड़ेगा।

पुल पार करने में 7 घंटे लगेंगे
राजेश कुमार कहते हैं, हर दिन पटना से उत्तर भारत जाने वाले ट्रकों की संख्या लगभग 10 हजार है। जेपी सेतु और आरा के पास बने डबुरा पुल की वजह से ट्रक चालकों को पहले ही लंबा इंतजार करना पड़ता है। डबुरा पुल पार करने में चालक 4 से 5 घंटे का इंतजार करते थे। जेपी सेतु बंद होने के बाद सभी वाहन डबुरा पुल को पार करेंगे, जिससे उन्हें 8 से 10 घंटे का इंतजार करना होगा।

बख्तियापुर में भी बन रहा पुल
बख्तियारपुर में गंगा पर नए पुल के निर्माण की योजना 2009-10 में शुरू हुई। बख्तियारपुर से समस्तीपुर के ताजपुर को जोड़ने वाली इस पुल का निर्माण 2014 में ही पुरा कर लेना था। लेकिन, जमीन अधिग्रहण में परेशानी और निर्माण कंपनी की सुस्त चाल के कारण पुल का निर्माण अभी 50 फीसदी ही हो पाया है। इसे पूरा होने में कम से कम तीन-चार साल लगेंगे।

आगे क्या : अभी पुल का मेंटेनेंस सिर्फ कागजों पर चल रहा है। रेलवे की जिम्मेदारी ही पुल के मेंटेनेंस की भी है। लेकिन अभी यह योजना ही नहीं बन सकी है कि मेंटनेंस में क्या-क्या कार्य किए जाएंगे। वर्तमान में हाइट गेज बैरियर लगा कर ट्रकों का परिचालन रोक दिया गया है।
आगे क्या : अप्रैल 2020 तक पश्चिमी लेन काे चालू करने का लक्ष्य है। सभी 44 पायों पर नया लोहे का स्पैन चढ़ा दिया गया है। उन्हें जोड़ने का काम चल रहा है। इस लेन के चालू होते ही यहां से सभी प्रकार के ट्रकों का परिचालन शुरू हो जाएगा।

गांधी सेतु की पूर्वी लेन क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण निर्माण सामग्री लोडेड ट्रक नहीं जा रहे हैं। खाली ट्रक और अनिवार्य सेवाओं के लिए छोटे ट्रक चल रहे हैं। पश्चिमी लेन को तोड़कर नए सिरे से बनाया जा रहा है, जिससे उसपर किसी प्रकार के वाहन का परिचालन नहीं हो रहा है।

आगे क्या : पुल पर ट्रकों के परिचालन शुरू होने में कम से कम चार महीने लगेंगे। रेलवे ने भार मापक यंत्र, सीसीटीवी कैमरा और हाइट बैरियर लगाने के लिए विभाग को पत्र लिखा है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मानें, तो इस पर काम शुरू हो गया है, लेकिन कम से कम चार महीने लगेंगे। इसके बाद ट्रक परिचालन की अनुमति मिल सकती है।


जेपी सेतु पर लगातार ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन के कारण दबाव बढ़ गया। रेलवे ने कहा कि एक स्पैन पर 330 टन से ज्यादा वजन नहीं पड़ना चाहिए। जबकि कई बार ट्रकाें के परिचालन के दाैरान एक स्पैन पर 440 टन से अधिक वजन का पता चला। रेलवे ने इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए परिचालन पर रोक लगाने के लिए सरकार को पत्र लिखा और अंतत: डीएम ने रोक लगा दी।

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