मैथिली भाषाक पढ़ाई नहि, मैथिली साहित्य संस्थान लेल आफिस चाही, नीतीश के सलाहाकार का विवादित बयान

दिन 7 जनवरी 2021। अवसर पटना के मैथिली साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित मैथिली दिवस। परिचर्चा का विषय- मैथिली भाषाक विकास में सरकार सें अपेक्षा। समाधान- मैथिली पढै ल जनता के अपन प्रयास करबाक चाही। मुदा मैथिली साहित्य संस्थान के एकटा दफ्तर भेंट जाय त बड़ नीक। कहानी समझने में परेशानी हो रही हो तो आपको हम डिटेल में समझाते हैं। मैथिली के नाम पर किस तरह से लोग अपनी दुकानदारी चला रहे हैं इसकी बानगी पटना में तब देखने को मिले जब डॉ भैरव लाल दास ने धन्यवाद ज्ञापन के दौरान ​बिहार के सीएम नीतीश कुमार के सलाहकार अंजीन कुमार से आग्रह करते हुए एक कार्यालय देने की मांग की। वैसे आयोजन का उद्देश्य यह था कि किसी तरह से मैथिली भाषा का विकास हो।

वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र कहते हैं कि अभी मिथिला दिवस के एक कार्यक्रम में हूं। मुख्यमंत्री के सलाहकार अन्जनी सिंह अतिथि हैं। उन्होने इस आयोजन में हिन्दी में बोलते हुए ताल ठोक कर कहा कि सरकार बांग्ला में तो बिहार में प्राथमिक शिक्षा दे सकती है, मैथिली में नहीं। क्योंकि मैथिल लोग ही मैथिली नहीं पढ़ना चाहते। उनके इस बयान के बावजूद सभागार में बैठे लोग ताली बजा रहे हैं। यही मैथिली का असली कल्चर है। लोगों का खून पानी हो गया है। सत्ता से जुड़े लोगों की चाटुकारिता करके कुछ हासिल हो जाये तो हो जाये।

कार्यक्रम में उपस्थित विधान परिषद के सदस्य और कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्र ने कहा कि मैं लगातार सदन में मैथिली भाषा में पढ़ाई हो इसके लिए अवाज उठाता हूं लेकिन मिथिला के अन्य विधायक और नेता का साथ इस मुद्दे पर कभी भी नहीं मिलता है। इतिहास साक्षी है कि बिना सत्ता आदेश के आज तक कोई कानून सफल नहीं हो सका है। हालांकि प्रेमचंद मिश्र का बयान डा भैरव लाल दास को नागवार गुजरा। मंच संचालन के दौरान ही उन्होंने मिश्राजी को ज्ञान देना शुरू किया। साथ ही मंच पर बैठे अंजनी कुमार के सामने चमचई करते हुए कहा कि आशा करता हूं कि वह इन बातों का बुरा नहीं मानेंगे। यह मंच इस तरह की बातों के लिए नहीं है। पटना में मैथिली के सभी संस्थानों का अपना एक कार्यालय है अगर शिवकुमारजी के मैथिली साहित्य संस्थान को भी उठने बैठने के लिए कार्यालय मिल जाए तो उनका उपकार होगा।

अध्यक्षीय भाषण में प्रो. डॉ. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि मैथिली भाषा को प्राथमिक शिक्षा में स्थान देने के साथ-साथ जब तक इसे शास्त्रीय भाषा के रूप में सरकार द्वारा मान्यता नहीं दी जाएगी, इसके साथ न्याय नहीं होगा। अपने बीज वक्तव्य में रमानन्द झा रमण ने कहा कि जब तक प्राथमिक शिक्षा में मैथिली को शामिल नहीं किया जाएगा, भाषा को पूर्ण सम्मान नहीं मिल सकता है।

उषा किरण खान ने प्रत्येक जिले में बालभवन की स्थापना पर जोर दिया ताकि बच्चे वहां भाषा एवं संस्कृति का ज्ञान प्राप्त कर सकें। सदस्य बिहार विधान परिषद प्रेमचंद्र मिश्र, विधायक मुरारी मोहन झा, चंद्रहास चौपाल, पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा ने विचार रखे। अतिथियों का स्वागत भैरव लाल दास ने किया और धन्यवाद ज्ञापन शिव कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर धीरेंद्र लाल दास अरविन्द की पुस्तकें डायपर वीसा और कक्का कहलनि, विजय कुमार लाल की पुस्तक सुख दुख की रोशनी और अशोक कुमार सिन्हा की पुस्तक मिथिला की नदी घाटी का पुरातत्व का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में प्रो जयदेव मिश्र, प्रो समरेन्द्र नारायण आर्य, प्रो वीरेंद्र झा, प्रो अविनाश झा, गजानन मिश्र, विवेकानंद झा, उमेश मिश्र, विवेकानंद ठाकुर, प्रेम लता मिश्र, राम सेवक राय, जय नारायण ठाकुर, अशोक, कुणाल, दिनेश चन्द्र झा] रघुवीर मोची, योगानन्द झा, उमेश चन्द्र द्विवेदी वाई एन मल्लिक, रमण कुमार दास, अद्भुतानन्द आदि उपस्थित थे।

वरिष्ठ रंगकर्मी कुनाल लिखते हैं कि हमरा स आई एकटा पैघ अपराध भ गेल …..”मैथिली दिवस ” के आयोजन छलइ पटना म्यूजियम के सभागार मे।मुख्य कि विशिष्ट अतिथि श्री अंजनी कुमार सिंह ई कहइत हिंदी मे बजला जे मैथिली ओ अपन घर परिवार मे बजइ छइथ त से अशुद्ध हेतइ ….हमरा स अपराध भेल जे हम चुपचाप सुनइत रहलौं.. किछु नइ बजलउँ ….हमरा टोकक चाहइ छल …..जाहि भाषा मे अहां अपन पत्नी स, बाल-बच्चा स, माता -पिता स , सर – कुटुम स बतिआई छी ,तकरा केना अशुद्ध कहइ छी ! …एक तरहे अहां ओइ भाषा के अपशब्द कहइ छीमहोदय, अहां वरिष्ठ प्रशासक छी।अहां मैथिल सेहो छी।अहांके अवश्ये बूझल होएत जे मैथिली बड्ड पैघ भाषा छी।एकर अनेकानेक बोली छइक ।अहां सक्षम छी, सर्वे करा लिअ।मैथिली क बोली क संख्या सैकड़ा स बेसी भेटत।अहां जे बजइ छी तकरा अशुद्ध कहि क अहां अपमानित करइ छी। हम सुइन क अपराध करइ छी ।…..हमरा क्षोभ अइ जे हम चुप रहि गेलौं …ठीके कहलइन अशोक जी, सबहक सरस्वतीए मन्द भ गेल छइ …

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