‘देशभक्त सरकार को ये क्या हो गया है ? मोदी सरकार का रक्षा बजट 1962 से भी कम

आम बजट में रक्षा क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें लगी हुई थी, लेकिन सरकार ने अंतरिम रक्षा बजट आवंटन में कोई बदलाव नहीं किया। जो राशि अंतरिम बजट में आवंटित की गई थी उसी को आगे बढ़ाया गया है। अलबत्ता सैन्य बलों के लिए विदेशों से रक्षा उपकरणों की खरीद में बुनियादी सीमा शुल्क में छूट देने का ऐलान किया है। इससे खरीद में रक्षा मंत्रालय को करोड़ों की बचत होने की उम्मीद है।

देश की पहली पूर्णकालिक महिला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मोदी सरकार -2 का पहला बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए रक्षा बजट में 6.87 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और यह 3.18 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. 15 लाख से ज्यादा सैन्य शक्ति वाली भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए बजट क्या लेकर आया, इसपर नजर डालें तो कुछ खास नजर नहीं आता।

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वित्त मंत्री की ओर से पेश के किए गए बजट में आवंटित 3.18 लाख करोड़ रुपये 2019-2020 के संभावित जीडीपी का केवल 1.5 प्रतिशत हैं, जो 1962 में चीन से युद्ध के दौरान के बाद सबसे कम आंकड़ा है। इसके अलावा 1.12 लाख करोड़ रुपये अलग से सेना और इससे जुड़े असैन्य कर्मचारियों के सुरक्षा पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं। सैन्य विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि चीन और पाकिस्तान के साथ हर तरह के हालात के लिए तैयार रहने और मजबूत ढांचे के लिए सेना को कम से कम जीडीपी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए।

बजट में रक्षा सेवाओं, पेंशन आदि के लिए तो पर्याप्त आवंटन है, क्योंकि यह वास्तविक व्यय के आधार पर है। लेकिन आधुनिकीकरण की राशि ज्यादा नहीं है। इसलिए इसका असर नई रक्षा खरीद पर पड़ सकता है। दरअसल, कई खरीद परियोजनाएं लंबित हैं, उनका भुगतान होना है। दूसरे, एचएएल में बड़े पैमाने पर तेजस लड़ाकू विमानों का निर्माण होना है जिसका भुगतान रक्षा मंत्रालय को करना होगा। दूसरे रक्षा उपक्रमों को भी मंत्रालय ने कई कार्य दिए हैं। लेकिन आवंटन नहीं बढ़ने से उनके पूरा होने में विलंब हो सकता है।

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