वीलेन बने PM मोदी, जब तैयारी का वक्त था, तब लापरवाही की, भारत ने ब्राजील-ब्रिटेन से सबक नहीं लिया

देश में कोरोना महामारी ने आपदा का रूप ले लिया है। बीतेे साल 18 जून को 11 हजार केस आए थे और अगले 60 दिन में औसतन हर रोज 35 हजार केस आने लगे थे। 10 फरवरी को दूसरी लहर शुरू होने पर हर दिन 11 हजार केस आ रहे थे। 6 अप्रैल को देश में 1 लाख केस आने लगे और अब महज 15 दिन में नए मामलों ने 3 लाख के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है, जो दुनिया में सर्वाधिक है। अब तक देश में अाधिकारिक तौर पर कोरोना से 1.84 लाख मौतें हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर में कोरोना की रफ्तार अप्रत्याशित है।

दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में बेड और आईसीयू लगभग भर चुके हैं। भारत में आई इस तबाही पर द इंडिपेंडेंट, द गॉर्डियन, बीबीसी, ब्लूमबर्ग जैसे दुनिया के शीर्ष मीडिया संस्थान विश्लेषण कर रहे हैं। विशेषज्ञ जो कह रहे हैं, उसका निचोड़ यह है कि दूसरी लहर से पहले तैयारी के लिए मिले वक्त को भारत ने लापरवाही से गंवा दिया, जिसने अब तबाही का रूप ले लिया है। साथ ही, भारत में दूसरी लहर का बड़ा कारण कोविड का नया वैरियंट है। इसमें दो असामान्य म्यूटेशन हैं। इसलिए इसे डबल म्यूटेंट वैरियंट कहा जा रहा है।

11-15 मई के बीच पीक आ सकता है, तब 35 लाख सक्रिय मरीज होंगे
देश के वैज्ञानिक गणितीय मॉडल के आधार पर दूसरी लहर के पीक का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि 11-15 मई के बीच दूसरी लहर का पीक आने की संभावना है। तब देश में संक्रमितों की संख्या 33-35 लाख होगी। यानी अगले तीन हफ्ते तक नए मरीजों की संख्या बढ़ती रहेगी। पीक आने के बाद संख्या में गिरावट शुरू होगी। यदि यह गणना सही बैठती है तो दूसरी लहर का पीक पहली लहर के पीक की तुलना में तीन गुना अधिक है। बीते साल 17 सितंबर को पहली लहर का पीक आया था, तब देश में सक्रिय मरीजों की संख्या करीब 10 लाख थी। यह मॉडल बताता है कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और तेलंगाना में पीक 25-30 अप्रैल तक आ सकता है। ओडिशा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में 1-5 मई और तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में 6-10 मई तक आ सकता है। इस गणना के मुताबिक महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ पीक पर पहुंच चुके हैं।

जैसा कि भारत में हमेशा से ही देखा गया है, यहां के अयोग्य अफसरों की हेकड़ी, जनता में अति राष्ट्रवाद और यहां के राजनेताओं के लोकलुभावनवाद ने मिलकर एक एेसा गंभीर संकट पैदा कर दिया है, जिसकी संभावना हमेशा से ही थी। लेकिन इस परिस्थिति को ध्यान में रखकर कभी कोई तैयारी नहीं की गई। – मिहिर शर्मा, ब्लूमबर्ग के स्तंभकार

भारत ने ब्राजील और ब्रिटेन में आई दूसरी और तीसरी लहर से सबक नहीं लिया और कोई तैयारी नहीं की। मेरी चिंता यह है कि जिन लोगों ने शुरू में सबसे ज्यादा एहतियात बरती, बाद में वे लोग लापरवाह हो गए। यही लोग वायरस का शिकार हुए और सुपर स्प्रेडर बन गए। -भ्रमर मुखर्जी, बायोस्टैटिस्टियन और एपिडेमियोलॉजी, मिशिगन यूनिवर्सिटी

विज्ञान कहता है लोगों को भीड़ में तब्दील होने से रोकना चाहिए। ऐसे में हजारों लोगों को चुनावी रैलियों में एकत्रित होने कैसे दिया गया? खास तौर पर जब दुकानंे और ढाबे बंद रखे गए हैं। ऐसी परिस्थितियों में चुनावी रैलियों को आयोजित करना विज्ञान संगत तर्क कैसे हो सकता है? -डॉ. शाहिद जमील, त्रिवेदी स्कूल ऑफ बॉयोसाइंस के डॉयरेक्टर, अशोका यूनिवर्सिटी

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