मिसाल : एक मुस्लिम परिवार ने केक काटकर मनाई बकरीद, बकरे को बेचकर बाढ़ पीड़ितों की मदद की

NEW DELHI: ताजनगरी आगरा में ईद-उल-अजहा पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। सोमवार को यहां मस्जिदों में नमाज अदा की गई, इसके बाद कुर्बानियों का दौर शुरू हुआ। लेकिन यहां एक परिवार ने जीव रक्षा की बात करते हुए इको फ्रेंडली बकरीद मनाई है। कलमा पढ़ते हुए परिवार ने केक काटकर एक दूसरे को खिलाया और त्यौहार की मुबारकबाद दी। परिवार का मानना है, इस तरह के प्रयास से उन्होंने लोगों को जीव हत्या रोकने का संदेश दिया है।

लेकिन आगरा के एक परिवार ने मिसाल कायम कर जीव रक्षा की बात करते हुए केक काटकर बकरीद मनाई। परिवार के सभी लोगों ने कलमा पढ़ते हुए केक काटा और एक दूसरे को खिलकार गले लगाया। इस नेक परिवार का कहना है कि जीव हत्या कर किसी को कोई फायदा नहीं होता ना कोई खुदा खुश होता है। ये सब रुकना चाहिए इसलिए कुर्बानी को रोकने के लिए इस तरह का संदेश देना जरूरी था।


शाहगंज में रहने वाले गुलचमन शेरवानी तिरंगा पहनने के लिए मशहूर हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनके घर को तिरंगा महल के नाम से जाना जाता है। अगर आप किसी से भी पूछे की मुझे तिरंगा महल जाना है तो आपको गुलचमन का घर का रास्ता बताया जाएगा। गुलचमन कहते हैं कि 2017 में उन्होंने बकरीद पर कुर्बानी करने के लिए बकरा खरीदा लेकिन कुछ दिनों साथ रखने के बाद घर के बच्चों को उसके साथ लगाव हो गया। बच्चों ने उनकी कुर्बानी देने से मना कर दिया। उसके बाद मैंने भी मन बना लिया कि कभी बेजुबान की कुर्बानी नहीं देंगे।

मैंने उस बकरे को बेचा। उससे जो भी पैसा आया मैंने उससे बाढ़ पीडियों की मदद कर डाली। कुर्बानी देने से किसी का भला नहीं होता। केट काटकर बकरीद मनाने में उससे भी कहीं ज्यादा मजा है। हर इंसान को ये बात समझनी चाहिए।

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