नकली DSP निकला मधुबनी के आंधामठ का विजय कुमार, पटना पुलिस ने किया गिरफ्तार

जिस बेटे को उसका पिता भी समझता था डीएसपी, वह निकला फर्जी : बीपीएससी की परीक्षा पास करने पर मधुबनी के आंधामठ गांव का रहने वाला विजय कुमार भारती फर्जी डीएसपी बन गया। वह डाॅक्टर बिंदेश्वर मंडल का बेटा है। एमएससी पास भारती ने एक साल पहले वर्दी सिलवाई, नकली बैज व आईकार्ड बनवाया और डीएसपी बनकर वसूली करने लगा। करगिल चाैक पर वह मंगलवार की देर रात आटाेचालक काे किराया नहीं दे रहा था। वर्दी का धाैंस दिखाकर डांट-फटकार रहा था। इसी दाैरान कई आटाे चालक जमा हाे गए। सूचना मिलने के बाद गांधी मैदान थाने के दाराेगा प्रमाेद कुमार वहां पहुुंचे तो भारती ने उन्हें भी डीएसपी का आईकार्ड दिखा दिया। लेकिन उसपर डीजीपी का साइन नहीं था। प्रमाेद काे समझते देर नहीं लगी। भारती काे गांधी मैदान थाने लाया गया और सख्ती से पूछताछ की गई ताे उसने हकीकत बता दी। उसके बाद उसकी निशानदेही पर पुलिस ने शास्त्रीनगर थाने के देवी स्थान के पास रहने वाली उसकी बहन के घर में छापेमारी कर वर्दी, बैज, आईकार्ड, मुहर, टाेपी समेत कई चीजें बरामद कीं। टाउन डीएसपी अशाेक कुमार ने बताया कि भारती के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

उसके ठिकाने से दाे खाकी पैंट, खाकी के दो सोल्डर बैज, एक उलेन सोल्डर बैज जिसपर तीन स्टार अाैर बीपीएस लिखा था, बीपीएस की बैज लगी दो नीले रंग की टोपी, खाकी वर्दी की दो शर्ट, बीपीएस का बैज लगा एक खाकी रंग का बेल्ट, एक उलेन वर्दी, नीले रंग का तीन विसिल कोड, दो बरगद, विजय कुमार भारती के नाम से लिखा पांच नेम प्लेट, एक पिस्टल कवर भूरे रंग का, डायरेक्टर ऑफ बोर्ड न्यू दिल्ली एक गोल मुहर, डीजीपी ऑफ बिहार के नाम की एक मुहर, एक स्टांप पैड, भूरे रंग का बिन्डोलिया, एक जोड़ी भूरे रंग का जूता, आधार कार्ड, एक मोबाइल, बिहार पुलिस का फर्जी आईकार्ड व बायोडाटा मिला।

उसने अपने पिता को बताया था कि बीपीएससी पास कर डीएसपी बन गया है। पिता को चकमा देने के साथ ही एक महिला अधिकारी से शादी रचाकर मोटा दहेज लेने की उसने तैयारी कर रखी थी। उसने शादी डॉट काम पर जो बायोडाटा डाला था उसमें पेशा के काॅलम में आईपीएस लिखा था। नकली वर्दी पहनकर वह गांव आने-जाने लगा। डीएसपी की वर्दी में देखकर उसके परिजनों व गांव वालों को यकीन हो गया था कि वह पुलिस अधिकारी बन चुका है। चकमा देने के लिए वह अपनी तैनाती पटना बताता रहा। वर्दी का धौंस दिखाकर वह लोगों से वसूली, थानों व अधिकारियों के यहां पैरवी करता था। इसके लिए रकम भी वसूलता था। मधुबनी में अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई थानों में डीएसपी की नकली वर्दी पहनकर वह जा चुका था, लेकिन तब उसे पकड़ा नहीं जा सका।

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