CM नीतीश के लिए अशुभ रहेगा इस बार का दुर्गा पूजा, घोड़े पर आ रही है मां, सत्ता परिवर्तन तय है

सीएम नीतीश के लिए अशुभ रहेगा इस बार का दुर्गा पूजा, घोड़े पर आ रही है मां, सत्ता परिवर्तन तय है

सीएम नीतीश कुमार के लिए इस बार का दुर्गा पूजा धार्मिक रूप से ठीक नहीं लग रहा, जानकारों की माने तो इस बार जो संयोग बन रहा है ​उससे साफ है कि नीतीश कुमार की सीएम वाली कुर्सी जा सकती है, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के ज्योतिष विभाग के प्राध्यापक डॉ कुणाल कुमार झा बताते हैं कि शास्त्र के अनुसार घोड़े पर भगवती का आगमन सत्ता परिवर्त्तन का संकेत देता है . छत्र भंग होने का योग बन रहा है . वहीं यह कलह कारक भी है . देवी का प्रस्थान वाहन भैंस ( महिष) भी रोग व शोक कारक हो ता है.

शक्ति की देवी मां दुर्गा की आराधना की तैयारी चल रही है। 17 अक्टूबर से नवरात्र शुरू हो जाएगा। इस बार मां दुर्गा नवरात्र में घोड़े को अपना वाहन बनाकर आ रही हैं। पंडित राकेश उपाध्याय के अनुसार माता का इस रूप में आगमन को बेहतर संकेत नहीं माना जा रहा। ऐसी आशंका बनी रहती है कि माता के घोड़े पर आने से पड़ोसी देशों से युद्ध, सत्ता में उथल-पुथल के साथ ही रोग और शोक फैल सकता है। बता दें कि इस बार मां भैंस पर विदा हो रही है। इसे भी शुभ नहीं माना जाता है। शारदीय नवरात्र मां नवदुर्गा की उपासना का पर्व है। हर साल यह पावन पर्व श्राद्ध खत्म होते ही शुरू हो जाता है। इस बार अधिक मास के कारण नवरात्र विलंब से प्रारंभ हो रहा है।

कोरोना संक्रमण के कारण इस बार दुर्गा पूजा का आयोजन बदले हुए माहौल में होगा। राज्य सरकार की ओर से पंडालों के निर्माण से लेकर प्रतिमाओं की ऊंचाई तक तय कर दी गई है। लिहाजा घरों व मंदिरों में पूजा पर विशेष फोकस रहेगा। सार्वजनिक पूजा पंडालों की सजावट और मेले का उत्साह अपेक्षाकृत फीका हो सकता है। हिदू धर्म ग्रंथों में नवरात्र का विशेष महत्व

धर्मग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्र के पावन दिनों में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है, जो भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं। नवरात्र का हर दिन देवी के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है। हर देवी स्वरुप की कृपा से अलग-अलग तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं। नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है। बुराई पर अच्छाई की जीत का है त्योहार

पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नाम का एक राक्षस था, जो ब्रह्मा जी का बड़ा भक्त था। उसने अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके एक वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान मिला कि उसे कोई देव, दानव या पृथ्वी पर रहने वाला कोई मनुष्य मार न पाए। वरदान प्राप्त करते ही वह बहुत निर्दयी हो गया और तीनों लोको में आतंक मचाने लगा। उसके आतंक से परेशान होकर देवी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ मिलकर मां शक्ति के रूप में दुर्गा को जन्म दिया और मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। साल में चार बार आता है नवरात्र

वर्ष में चार बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है, जिसमें चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र हैं। व्रत रखने का अधिक महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्र का होता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में व्रत रखने पर मां का आशीर्वाद मिलता है और सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। दुर्गा पूजा में किस दिन कौन सी देवी की होगी पूजा

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