INDIA गठबंधन को बर्बाद करने के लिए PM मोदी ने नीतीश कुमार से की दोस्ती, BJP हर शर्त मानने को तैयार

नीतीश कुमार के लिए क्यों खुले बीजेपी के दरवाजे:नीतीश को साधते ही बिखर जाएगा I.N.D.I.A; चुनौती- भाजपा कार्यकर्ताओं को भी खुश रखना :

सियासत में कभी भी कोई दरवाजा परमानेंटली बंद नहीं होता। यहां अगर दरवाजे बंद होते हैं तो खुलते भी हैं।
-सुशील कुमार मोदी, पूर्व डिप्टी सीएम, बिहार (27 जनवरी दिल्ली से लौटने के बाद)

सुशील कुमार मोदी के इस बयान से स्पष्ट हो गया है कि नीतीश के लिए बीजेपी के दरवाजे एक बार फिर से खोल दिए गए हैं। इसके बाद बिहार में NDA सरकार का बनना भी लगभग तय माना जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर एक साल में ऐसा क्या हुआ कि नीतीश के लिए दरवाजे बंद करने वाली बीजेपी उनके स्वागत के लिए तैयार हो गई? किन शर्तों के साथ बीजेपी नीतीश कुमार को अपने साथ लाएगी। क्या बिहार में एक बार फिर से बीजेपी नीतीश कुमार की ताजपोशी करने की तैयारी कर रही है?

सूत्रों की मानें तो बीजेपी का पूरा का पूरा नेतृत्व पिछले 48 घंटों से इन्हीं सवालों को सुलझाने की कोशिश में जुटा है। पहले आनन-फानन में बिहार बीजेपी की कोर कमेटी के मेंबर को दिल्ली बुलाया गया। यहां प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के आवास पर आधे की मीटिंग चली।

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर लगभग 95 मिनट का मंथन हुआ। जेपी नड्‌डा और अमित शाह के साथ अलग मीटिंग भी की। बीजेपी सूत्रों और पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मदद से हमने बीजेपी के भीतर चल रही गतिविधियों को समझने की कोशिश की है।

सबसे पहले 2 पॉइंट में समझिए, नीतीश कुमार के लिए दरवाजे क्यों खुले

  1. बीजेपी चुनाव से पहले I.N.D.I.A. गठबंधन को खत्म करना चाहती: पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मानें तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार ही पेश कर रहे थे। विपक्ष के बिखरे कुनबे को एक मंच पर लाने का श्रेय नीतीश कुमार को जाता है। ये नीतीश कुमार ही थे जिन्होंने सबसे पहले कांग्रेस को गठबंधन के लिए तैयार किया।

इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश, बंगाल, दिल्ली,महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु जैसे राज्यों का ताबड़तोड़ दौरा किया। उन्होंने ममता बनर्जी और अखिलेश यादव को कांग्रेस के साथ आने के लिए राजी किए। जुलाई 2023 में वे ही पटना में बीजेपी विरोधी नेताओं को औपचारिक तौर पर एक प्लेटफॉर्म पर लाए।

नीतीश कुमार देशभर की 400 लोकसभा सीटों पर बीजेपी के खिलाफ वन वर्सेज वन कैंडिडेट उतारने के फॉर्मूले पर काम कर रहे थे। उनका सबसे ज्यादा फोकस बिहार की 40, यूपी की 80, झारखंड की 14, और बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को पटखनी देनी की थी।

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