जनता दरबार में बगल में बैठे अधिकारी को फोन करते रहे CM नीतीश, उसने नहीं उठाया की इग्नोर

नीतीश सरकार में अफसरशाही किस तरह से बेलगाम है इसका ताजा उदाहरण उस समय मिला जब जनता दरबार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बगल में बैठे अधिकारी को फोन करते रहे लेकिन उस अधिकारी ने फोन नहीं उठाया. बिहार के एक पत्रकार है प्रशांत कुमार उन्होंने अपने फेसबुक पर जो कुछ लिखा है आइए हम आपको डिटेल में बताते हैं…

शुक्र है, लगातार ज्ञान भूमि का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “सच्चाई का बोध” हुआ। सच आंखों के सामने आ गया। हद से ज्यादा हकीमों की तरफदारी यानी ब्यूरोक्रेसी को बढ़ावा देने का नतीजा ये रहा कि अधिकारी अब उनके आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। उनके फोन कॉल को भी गंभीरता से नहीं ले रहे।

दरअसल, जनता दरबार में एक मामला भागलपुर से जुड़ा आया। बुजुर्ग फरियादी सीएम से अपनी फरियाद सुनाते हुए रोने लगे। बताया कि आपके आदेश के बाद एसडीओ ने हमारे मामले को पेंडिंग में डाल दिया और दबंग मेरी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। इसके बाद सीएम हर बार की तरह चौंके “अरे ऐसा कैसे हो रहा है।” फिर, एक अधिकारी को कॉल की। घंटी बजती रही, मगर अधिकारी ने फोन उठाने में काफी देर कर दी, जबकि वे वहीं थोड़ी दूरी पर बैठे थे।

साहब, ये सच है। बिना दाम के काम नहीं होता। सारी चीजों का रेट फिक्स है। सब बिकने को तैयार हैं। खरीदारों की भी कमी नहीं है। कार्यालयों में आम आदमी को मक्खी की तरह भगा दिया जाता है और जरूरत पर कोई अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।

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