प्रधानमंत्री जी, मुझे आपकी बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि आप ‘धोखेबाज’ हो

प्रधानमंत्री जी, मुझे आपकी बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि…..आज आपने गांधी जी का ढाल आजमाया. कहा, गांधी जी ने कहा था, धार्मिक रूप से उत्पीडित लोगों का ख्याल रखना होगा. गांधी जी ने तो अफ्रीका में अंग्रेजों द्वारा एशियाई लोगों पर थोपे गए उस काले कानून के खिलाफ अपना पहला सत्याग्रह भी किया था, जिसका नाम था, एशियाटिक अमेंडमेंट लॉ. ये कानून कहता था कि सभी एशियाई को अपना कॉम्पलसरी रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अब ये लॉ क्या है, गूगल कीजिए या चाहे तो अर्बन…ओहो…..सॉरी…अर्णब से भी डिटेल मंगा सकते है. तो गांधी को ढाल बनाना और गांधी की बात मानना, दो बातें है. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आज आपने कहा, मैंने क्या किया, वही जो मनमोहन सिंह कहते थे, मनमोहन सिंह भी इसका समर्थन करते थे. मैंने बस वहीं काम किया सीएए ला कर. अब सवाल है कि आपने तो कहा था कि मैं कांग्रेस कल्चर/नीतियों से अलग काम करूंगा. आप कब से मनमोहन सिंह की बात पर, सलाह पर काम करने लगे? तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आपने कहा, एनआरसी कांग्रेस लाई थी. सही बात है. अब कांग्रेस तो बहुत कुछ लाई थी, सब को कंटीन्यू करेंगे आप? बोलिए करेंगे? नहीं ना…. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आप कहते हैं, सरकार में एनआरसी पर कोई बात ही नहीं हुई है, लेकिन आपके गृह मंत्री कहते हैं कि कैब के बाद एनआरसी लागू होगा. अब किसकी बात पर भरोसा करे?इतना भी बोल दिए होते कि गृह मंत्री ने गलत बोला हैं, तो आपकी बात मान लेते. ऐसा कुछ सुना नहीं. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आपने तो ये भी कहा था कि नोटबन्दी से 50 दिनों में देश को फायदा हो जाएगा. अब फायदा क्या हुआ, ये तो जीडीपी के आकडे बता ही रहे है. लेकिन, आपने ये भी वादा किया था कि 50 दिन बाद चौराहे पर बात करेंगे. कुछ नहीं हुआ ऐसा? तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आपने कहा था, बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार. अब ये 16 दिसंबर 2013 और दिसंबर 2019 में क्या अंतर रह गया है? हैदराबाद से ले कर उन्नाव, सेंगर से ले कर चिन्म्यानंद तक, हम वहीं फंसे हुए है. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आपने कहा था, हर साल दो करोड लोगों को रोजगार देंगे. उलटे नोटबंदी/जीएसटी ने रोजगार छीन लिया. आपने कहा, पकौडा बेचना भी रोजगार है. अब सर, प्याज भी 150 रुपये किलो, कहां कोई पकौडा खाएगा, कोई बेचेगा. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आज आपने कहा, मेरी योजनाएं सबके लिए है, किसी की धर्म/जाति नहीं पूछते हम. लेकिन, आपने ये भी कुछ दिन पहले कहा कि पोशाक से पहचाने जा सकते है कि हिंसा कौन कर रहा है? इसका मतलब क्या है सर..? दो दिन, दो बातें….. तो, कैसे करे आपकी बात पर भरोसा..?

आज आपने कहा, दिल्ली में पानी बहुत गन्दा आता है. दिल्ली में वाटर प्योरीफायर की बिक्री सबसे ज्यादा है. काश, आप अपने उपभोक्ता मंत्री पासवान जी और सांसद हेमा जी (जो केंट आरओ का एड करती है) से पूछ लिया होता कि वे दिल्ली में कौन से पानी का इस्तेमाल करते हैं. और सर, दिल्ली की जनता पर बडी मेहरबानी होती, गर बता देते कि आप 7, लोकमा रोड में खुद के लिए कौन सा वाटर प्योरीफायर यूज करते हैं, ताकि हम उस अमृत समान पानी से वंचित जनता भी उसी ब्रांड का भरोसेमन्द ब्रांड खरीद सके. प्रणाम धन्यवाद अभयदान की अपेक्षा का आकान्क्षी।

शशि शेखर

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *