पान मसालों की बिक्री पर लगे प्रतिबंध की अवधि खत्म, बिहार के चौक-चौराहे पर हो रही बिक्री

पटना. राज्य में उन हानिकारक पान मसालों की ब्रिक्री पर प्रतिबंध की अवधि समाप्त हो गयी है जिन पर 31 अगस्त, 2019 और दो सितंबर, 2019 से प्रतिबंध लगाया गया. इन पान मसालों में घातक रसायन पाये गये थे. इसके बाद पूरे राज्य में उन नामी- गिरामी पान मसालों की बिक्री, परिवहन और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा फिलहाल राज्य में बिकनेवाले पान मसालों पर कोई भी निर्णय नहीं लिया जा रहा है. वैसे पान मसालों पर लगे प्रतिबंध की अवधि नहीं बढ़ाये जाने के कारण उनकी पूरे राज्य के चौक- चौराहे पर धड़ल्ले से बिक्री हो रही है.

हालांकि, राज्य से दर्जनों ब्रांड के पान मसालों के नमूनों नियमित अंतराल के बाद लगातार जांच के लिए भेजा जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन खाद्य संरक्षा आयुक्त सह प्रधान सचिव ने 30 अगस्त, 2019 को एक आदेश से राज्य में 12 ब्रांडवाले पान मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था.

इन मसालों मैगनेशियम कार्बोनेट पाया गया था. जिन मसालों में मैगनेशियम कार्बोनेट पाये गये थे उनमें रजनीगंधा पान मसाला, राजनिवास पान मसाला, सुप्रीम पान पराग पान मसाला, रौनक पान मसाला, सिग्नेचर पान मसाला, पासन पान मसाला, कमला पसंद पान मसाला, मधु पान मसाला शामिल थे.

साथ ही दो सितंबर 2019 को खाद्य संरक्षा आयुक्त द्वारा शिखर पान मसाला, विमल पान मसाला और सर गोल्ड पान मसाला पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया. इन सभी उत्पादों पर एक साल के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबंध लागू कर दिया गया था. इन सभी पान मसालों पर प्रतिबंध की अवधि तीन माह गुजर गयी है.

अभी तक इनके सैंपल की जांच रिपोर्ट के लिए भेजी गयी है. बिना रिपोर्ट मिले इन सभी पान मसालों की खुलेआम बिक्री हो रही है. इधर, स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एफएसएसआइ के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के एक भेजे गये पत्र के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है. साथ ही पान मसाला के नमूनों के रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

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