पप्पू यादव ने पटना के लोगों के लिए किया वो केवल पप्पू ही कर सकते हैं

पप्पू यादव होगा कभी दु’र्दांत और बाहु’बली लेकिन आज उसका बाहुबल पटना के बाढ़ पीड़ितों के काम आ रहा है। दर्जनों बार आजमाया है इस आदमी को, जरूरतमंदों के लिए खड़ा पाया है। जो पप्पू यादव ने पटना के लोगों के लिए किया वो केवल पप्पू ही कर सकते है। क्योंकि आपदा में मदद जुनून से की जाती है सिस्टम से नहीं।

अपनी ही छवि में डूबा एक शख्स हर बार लड़ कर भी हार जाता है । 2008 में बिहार में कोसी नदी का कुसहा स्थित तटबंध टूटा ।सैंकड़ों गाँव डूब गए , लाखों लोग बेघर हुए । नेता हेलीकॉप्टर में उड़े हवाई सर्वेक्षण किया पर एक शख्स था जो अपनी पत्नी के संग मिलकर उसी जल प्रलय में उतर गया । नावों से दूर -दराज में डूबे गाँवों तक पहुँचा , लोगों के आँसू पोंछे । वो थे पप्पु यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन । कोसी क्षेत्र में कहीं भी दँगा हों , बाढ़ आए , आग लगे , पप्पु यादव अवश्य पहुँचते हैं । लोगों से मिलते हैं , बात करते हैं और यथासंभव सहयोग भी करते हैं । यहाँ तक की लोगों की व्यक्तिगत परेशानियों में भी वो लोगों तक पहुँचते हैं और सहयोग करते हैं ।

2014 लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव मधेपुरा से और उनकी पत्नी रंजीत रंजन सुपौल से सांसद बने। इस दम्पती का सेवाभाव इनके साथ -साथ दिल्ली भी गया । वहाँ इन्होंने सुभाषचंद्र बोस सेवाश्रम की नींव डाल दी । अपने आप में अद्भुत -अविश्वसनीय इस सेवाश्रम में रोज़ाना बिहार से पहुँचे सैकड़ो मरीजों के लिए रहने और खाने की निःशुल्क व्यवस्था की गईं । ये सहज ही समझा जा सकता है की किसी भी बड़े शहर की ओर रुख करते ही किसी भी व्यक्ति के ज़ेहन में पहला सवाल यही होता है की ठहरना कहाँ है ? ख़ास कर बिहार के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए तो ये समस्या असाध्य है । ऐसे में ये कहना अतिशयोक्ति नहीँ होगी की सेवाश्रम की रहने -खाने की व्यवस्था के कारण ही सैंकड़ों ग्रामीण दिल्ली जाकर ईलाज करवा पाए । ये भी जान लीजिए की सेवाश्रम में ग्रामीण मरीजों को एम्स जैसे अस्पतालों में ईलाज करवाने के लिए अलग से व्यक्ति नियुक्त थे । ज़रा सोच कर देखिए दिल्ली जैसा शहर , 365 दिन , 24 घंटे, सैकड़ो लोग (इसमें मरीज़ भी शामिल )आवास और भोजन निःशुल्क ………ये अकल्पनीय नहीँ तो ओर क्या है ?

वर्तमान में पटना की जल -समस्या में पप्पू यादव का कार्य काफ़ी सराहा जा रहा है ।वे रात -दिन पीड़ितों की सेवा में जुटे हैं ।
कोसी क्षेत्र में सड़क की समस्या हो या रेल की , बिजली का सवाल हो या पानी का कोई एक व्यक्ति यदि सड़क से लेकर संसद तक लड़ता दिखता है तो वो हैं पप्पू यादव । फ़िर भी क्यूँ दोनों पति -पत्नी चुनाव हार जाते हैं ? क्या कारण है की आरोपों के पहाड़ तले दबे लालूजी का विकल्प नहीँ बन पाते हैं पप्पू यादव ?

इसके कई कारण हो सकते हैं । उनकी दबंग छवि जिससे इतर लोग उन्हें स्वीकार ही नहीँ कर पा रहे ।बारम्बार दल बदलना जिससे कार्यकर्ताओं में उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध होती है । पति -पत्नी का अलग -अलग दलों में होना जो उनके कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास को कम करता है । संगठन की बजाय व्यक्तियों पर निर्भरता जो आम लोगों तक पहुँचने से रोकता है।ये विचारणीय हैं जिस पर सोचा जाना चाहिए । एक ऐसा शख्स जिसमें क्षमता है , सक्रियता है , ऊर्जा है , जातीय समीकरण भी है और सबसे उल्लेखनीय अकल्पनीय सेवा भावना है फ़िर चूक कहाँ होती है ?

Anand Sharma

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