दिनभर हड़ताल के बाद काम पर लौटे जूनियर डॉक्टर, सचिव ने मांगाें काे पूरा करने का दिया आश्वासन

PATNA : पीएमसीएच समेत राज्य के सभी मेडिकल काॅलेजाें के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल नाै घंटे में ही समाप्त हाे गई। जूनियर डॉक्टर अाठ सूत्री मांगाें को लेकर सोमवार की सुबह 8 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा सभी मांगों को पूरा करने का अाश्वासन मिलने के बाद सोमवार की शाम काम पर लौट अाए। प्रधान सचिव ने मांगों पर विचार करने के लिए अपर सचिव कौशल किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है।

इसमें पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी, एनएमसीएच के प्राचार्य डॉ. विजय कुमार गुप्ता, पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद, जूनियर डाॅक्टर एसाेसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रविरंजन कुमार रमण व जेडीए पीएमसीएच के अध्यक्ष डॉ. शंकर भारती शामिल हैं। कमेटी अपनी रिपोर्ट 5 अक्टूबर को देगी। जेडीए पीएमसीएच के अध्यक्ष डॉ. शंकर भारती ने बताया कि मांगों पर सहमति बन गई है

डॉक्टरों ने नहीं दी सूई-दवाई, मेरे बच्चे की जा’न चली गई : जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल नाै घंटे में ही समाप्त हाे गई, लेकिन चारों ओर मरीज और परिजन परेशान दिखे। मेजर-माइनर 10 ऑपरेशन स्थगित करने पड़े। अोपीडी में 1921 और इमरजेंसी में 350 ने रजिस्ट्रेशन कराया। मौतें चार हुईं और इसे अस्पताल प्रशासन हड़ताल से जोड़कर देख भी नहीं रहा है। लेकिन, चारों तरफ दिखे कष्ट का जवाब किसी के पास नहीं है। नालंदा के एकंगरसराय के मंगल बिंद और उनका पूरा परिवार फूट-फूट कर रो रहा था।

 

“डॉक्टर ने मेरे भांजे की जा’न ले ली। चार दिन पहले बच्चे को भर्ती कराया था। तब ठीक था, लेकिन सोमवार की सुबह से उसे कोई देखने नहीं आया। सूई-दवाई देने नहीं आया। दाेपहर 12 बजे उसकी मौत हो गई।” मंगल कहते हैं-डॉक्टर ने आदित्य राज को भर्ती कराने वक्त कहा था कि एक-दो दिनाें में अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी, लेकिन मेरा भांजा हमेशा के लिए चला गया। जिसके पास गए, उसने कहा-हड़ताल है, थोड़ा इंतजार करो। अभी डॉक्टर साहब नहीं हैं। मेनिनजाइटिस पीड़ित आदित्य 21 सितंबर को भर्ती हुआ था। वेंटिलेटर पर भी उसे नहीं देखा गया।

दुल्हिन बाजार के उपेंद्र कुमार अपने अाठ साल के भाई धर्मवीर कुमार को इलाज के लिए लाए थे। धर्मवीर को बिच्छू ने डंक मार दिया है। उपेंद्र ने कहा नर्स के पास जा रहे हैं तो नर्स कहती हैं कि डॉक्टर जबतक कुछ नहीं लिखेंगे तबतक क्या दवा दें?

जहानाबाद के मधुमेह के मरीज राजेश्वर सिंह को उनके परिजन दूसरे अस्पताल ले जाते दिखे। राजेश्वर सिंह का कहना था कि शनिवार को भर्ती हुए थे। अब यहां हड़ताल हो गई है। अब कौन इलाज करेगा? शुगर 600 पर पहुंच गया था। सचिवालय से रिटायर हैं, इसलिए यहीं आया।

बेगूसराय के फूलचंद पासवान पत्नी अनुराधा देवी को लेकर इलाज के लिए पहुंचे थे। अनुराधा का पेट फूल गया था और वह पेट दर्द से परेशान थी। फूलचंद का अारोप है कि अनुराधा को भर्ती ही नहीं लिया गया। कहा गया कि यहां हड़ताल है, इलाज नहीं हो पाएगा। इसे कहीं और लेकर जाएं। दर्द के लिए इंजेक्शन भी लग जाता तो उसे राहत मिल जाती। अब महावीर कैंसर अस्पताल लेकर जा रहे हैं।

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