पटना हाईकोर्ट : प्लेटफॉर्म पर मां-बेटे की ऐसी तस्वीर दुर्भाग्यपूर्ण और बहुत स’दमा देने वाली है

PATNA : मुजफ्फरपुर प्लेटफॉर्म पर रखी अरवीना खातून की बॉडी पर पड़े कपड़े (कफन) को आंचल समझकर खेलते उसके नौनिहाल (रहमत) की खबर से पटना हाईकोर्ट द्रवित हो गया। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और बहुत सदमा देने वाला कहा। इस पर संज्ञान लिया, इसे जनहित का मामला बनाया, कोर्ट मित्र नियुक्त किया और सरकार से इसके बारे में तुरंत जवाब लिया। 3 जून को फिर इस मामले की सुनवाई होगी।

गुरुवार को कोर्ट रूम में जस्टिस एस. कुमार ने इस खबर को चीफ जस्टिस संजय करोल को दिखाया। दोनों की खंडपीठ ने इस मसले पर स्वत: संज्ञान लिया तथा इसे जनहित के मामले में तब्दील किया। राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया। सुनवाई, दो किश्तों में हुई। दूसरी पाली में यानी सवा दो बजे राज्य सरकार की तरफ से जवाब दिया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरा ब्योरा व परिस्थितियों की जानकारी हलफनामा दायर कर देने के लिए कहा है।

अपर महाधिवक्ता ने कहा- मौ/त प्राकृतिक, न केस हुआ न ही पोस्टमार्टम : कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जून को तय की है। दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सूर्यदेव यादव ने कोर्ट से कहा-यह खबर अंशतः सही है। अरवीना मानसिक तौर पर बीमार थी। उसके पति ने उसे छोड़ दिया था।

कटिहार की रहने वाली यह महिला, सूरत से वापस घर अपनी बहन व बहनोई के साथ लौट रही थी। यात्रा के दौरान उसकी प्राकृतिक मौ/त हुई। इसकी खबर उसके साथ लौट रहे उसके बहनोई ने मुजफ्फरपुर आकर रेलवे अधिकारियों को दी। रेलवे अधिकारियों ने प्राथमिक पड़ताल वगैरह करके शव को मृ/तका के बहन व बहनोई को सौंप दिया। न कोई एफआईआर हुई। न ही कोई पोस्टमार्टम हुआ।

मृ/तका के बच्चे की कस्टडी प्रशासन ने मौसी को सौंपी : हाई कोर्ट ने पूछा था कि अरवीना खातून की मौ/त वाकई भूख के कारण हुई या किसी अन्य वजह से? उसके बच्चे किसके संरक्षण में हैं? उनकी देखभाल कौन कर रहा है? जवाब में सरकार ने बताया कि मुजफ्फरपुर प्रशासन ने आवश्यक सभी प्रबंध किए। बच्चे की सुरक्षित कस्टडी उसकी मौसी को दी है।

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