पटना में रूम रेंट देने से पहले मकान मालिकों को लेना होगा लाइसेंस, रोज लगेगा 50 रुपया जुर्माना

राजधानी में अब किसी भी परिसर के व्यावसायिक उपयोग से पहले ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा रहा है। इसको लेकर पटना नगर निगम अनुज्ञप्ति विनियम 2020 तैयार कराया गया है। 3 जनवरी तक इस पर आमलोगों से शिकायत व सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इन शिकायताें अाैर सुझावों की समीक्षा के लिए निगम की ओर से कमेटी गठित की गई थी। ट्रेड लाइसेंस का आवेदन करने के लिए 30 दिन की जगह 60 दिन देने के सुझाव को स्वीकार कर लिया गया है। अगर कोई 60 दिन के भीतर लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसे 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भरना पड़ेगा। अपर नगर आयुक्त स्थापना देवेंद्र प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने साफ किया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की अनुसूची में उल्लेखित कार्य श्रेणी परिसरों को गैर आवासीय परिसर माना जाएगा। जिन परिसर में आमलोग रहते हैं, वही आवासीय माने जाएंगे।

अभी अाॅनलाइन अाैर अाॅफलाइन दाेनाें तरह से हाे सकेगा अावेदन : चैंबर अाॅफ काॅमर्स की ओर से ट्रेड लाइसेंस लेने की अवधि आदेश जारी होने के 30 दिन के भीतर को बढ़ाकर 60 दिन करने के प्रस्ताव दिया गया था, जिसे कमेटी ने मान लिया। हालांकि, 60 दिन से 90 दिन के भीतर आवेदन करने वालों को 500 रुपए दंड लगाने के सुझाव को कमेटी ने नकार दिया। चैंबर की ओर से ट्रेड लाइसेंस का आवेदन ऑनलाइन करने अाैर परिसर का इंस्पेक्शन न किए जाने की मांग की गई। इस पर कमेटी ने साफ किया है कि अभी ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों का प्रावधान किया गया है। लाइसेंस जारी करने के लिए परिसर का इंस्पेक्शन जरूरी है। आवेदक की ओर से जवाब आने के सात दिनों के भीतर लाइसेंस जारी होने और 20 दिन में कोई कार्रवाई नहीं होने पर अपने आप अप्रूवल माने जाने के प्रस्ताव को भी कमेटी ने अस्वीकार कर दिया। कमेटी ने कहा कि ट्रेड लाइसेंस से संबंधित प्रक्रिया को पूरा करने में कुछ समय लग सकता है।

नए भवनाें का व्यावसायिक उपयाेग ट्रेड लाइसेंस मिलने के बाद ही हाेगा। जिन भवनाें का पहले से व्यावसायिक उपयाेग हाे रहा है, उन्हें लाइसेंस लेने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की जाएगी। इस अवधि में लाइसेंस नहीं लिया जाता है तो बंद कराने की भी कार्रवाई की जाएगी।

लाइसेंस फीस में बदलाव का प्रस्ताव अस्वीकार : चैंबर की ओर से कहा गया कि लाइसेंस की अवधि तब तक मानी जानी चाहिए जब तक आवेदक की ओर से इसे निरस्त करने का आवेदन न किया गया हो। इस अवधि में हर साल वार्षिक शुल्क दिया जाएगा। इस पर निगम की कमेटी ने साफ किया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 342 के तहत लाइसेंस फीस का निर्धारण किया गया है। इस शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही कहा गया है कि जिन व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस जारी किया गया है उनकी ओर से भविष्य में व्यापार के प्रकार और क्षेत्रफल में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा लाइसेंस के लिए प्रमाण पत्रों की अनिवार्यता के प्रस्ताव को भी कमेटी ने अस्वीकार कर दिया। कमेटी का कहना है कि आवेदन में प्रॉपर्टी आईडेंटिफिकेशन नंबर व पैन नंबर देने का प्रावधान है। लेकिन, व्यापारियों की सुविधा के लिए इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।

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