पटना से नहीं चलेगा NOU, नालंदा होगा शिफ्ट, विवि नहीं शिफ्ट हुआ तो खतरे में होगी मान्यता

10 एकड़ में शुरू होगा प्राथमिक निर्माण, पहले बनेगा प्रशासनिक भवन, फिर दूसरे कार्यालय

PATNA ; नालंदा खुला विश्वविद्यालय अब पटना से संचालित नहीं होगा, इसे नालंदा में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। नालंदा खुला विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही इसे नालंदा शिफ्ट करना था लेकिन स्थान का चयन नहीं होने के कारण इसका भवन निर्माण लंबित रहा। बाद में एनओयू के लिए 10 एकड़ की जमीन का आवंटन राज्य सरकार की ओर से किया गया, जिसकी घेराबंदी का काम पूरा हो चुका है। शीघ्र ही वहां निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संबंध में एनअाेयू के प्रतिकुलपति प्रो. कृतेश्वर प्रसाद ने बताया कि विवि के अपने भवन का निर्माण फेजवाइज कराया जाएगा। इसमें पहले प्रशासनिक भवन का निर्माण होगा, जिससे मौजूदा सेटअप को शीघ्र शिफ्ट किया जा सके। राज्य सरकार ने पहले से आवंटित 10 एकड़ की भूमि के अलावा 30 एकड़ भूमि का निर्धारण भी कर लिया है, लेकिन इसकी घेराबंदी अभी पूरी नहीं हुई है, काम चल रहा है।

विवि नहीं शिफ्ट हुआ तो खतरे में होगी मान्यता : नालंदा खुला विश्वविद्यालय राज्य में सबसे अधिक पाठ्यक्रम चलाने वाला विश्वविद्यालय है। यहां 100 से अधिक काेर्स चलते हैं, जिनमें एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। लेकिन नालंदा खुला विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो के मानकों के अनुरूप नहीं है। डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो के मानकों के अनुरूप कम से कम 40 एकड़ में निर्मित कैंपस होना चाहिए, जो अभी तक बना नहीं है। हालांकि विवि प्रशासन कैंपस निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से आशान्वित है कि मान्यता पर असर नहीं पड़ेगा। प्रतिकुलपति प्रो. कृतेश्वर प्रसाद ने बताया कि कैंपस निर्माण के फर्स्ट फेज में प्रशासनिक भवन का निर्माण हो जाने और दूसरे भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाने से मान्यता पर असर नहीं पड़ेगा।

15 अगस्त तक पहला फेज पूरा होने के आसार : प्रो. प्रसाद ने बताया कि कैंपस के निर्माण का काम बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना निगम को दिया गया है। निगम के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई है और संभावना है कि 15 अगस्त तक प्रशासनिक भवन का काम पूरा हो जाएगा। हालांकि प्रशासनिक भवन के निर्माण के बाद भी विवि प्रशासन के पास कई चुनौतियां हैं। लाइब्रेरी और ऑटोमेशन में पिछड़ापन विवि प्रशासन के नकारात्मक पक्ष हैं। इसके अलावा स्टडी मेटेरियल भी अब तक ऑनलाइन मोड में उपलब्ध नहीं हैं, जो विद्यार्थियों के लिए परेशानी है। इसके साथ सिलेबस का अपडेशन भी करना होगा, जिससे यहां कोर्स च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम की शुरुआत हो सके।

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