जानें क्या होता है ‘अभिजीत मुहूर्त’ जिसमें पीएम मोदी करेंगे राम मंदिर का भूमि पूजन?

Patna: अयोध्या (Ayodhya) में 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) राम मंदिर (Ram Mandir) के लिए भूमि पूजन करेंगे. मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए तीन चरणों में विधि विधान से पूरी पूजा संपन्न कराई जाएगी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण होंगे वो 32 सेकेंड जिस दौरान पीएम मोदी राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे. जानकारी के अनुसार यह समय अभिजीत मुहूर्त (Abhijeet Muhurta) में आता है और समय 5 अगस्त की दोपहर 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड के ठीक बाद के ये 32 सेकेंड अहम होंगे. अब सवाल उठता है कि आखिर यही समय क्यों चुना गया और वह अभिजीत मुहूर्त आखिर क्यों इतना महत्वपूर्ण है जिस दौरान पीएम मोदी (PM Modi) राम मंदिर के निर्माण के लिए पहली ईंट रखेंगे?

ज्योतिष शास्त्र के बड़े जानकार नंदन संस्कृत विद्यालय, सरिसवपाही, मधुबनी के सहायक प्राध्यापक डॉ. काशीनाथ झा कहते हैं कि हमारा पूरा दिन यानी सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक के समय में कुल 30 मुहूर्त होते हैं. इनमें से 15 सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक तथा 15 सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक के हैं. सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय अंतराल को 15 बराबर भागों में बांटा गया है और पंद्रह भागों के मध्य भाग को अभिजीत मुहूर्त के नाम से जाना जाता है.

डॉ. काशीनाथ झा कहते हैं कि अभिजीत मुहूर्त श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है. अभिजीत मुहूर्त दिन के समय का सबसे अच्छा शुभ समय होता है. अभिजीत मुहूर्त दोषो और बाधाओं को समाप्त करता है. जिससे की किसी भी प्रकार का शुभ काम सफलता पूर्वक संपन्न हो. अभिजीत मुहूर्त प्रति दिन मध्यान्ह से करीब 24 मिनट पहले प्रारंभ होकर मध्यान्ह के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है. यानी यदि सूर्योदय ठीक 6 बजे हो तो दोपहर 12 बजे से ठीक 24 मिनट पहले प्रारम्भ होकर यह दोपहर 12:24 पर समाप्त होगी. बता दें कि अभिजीत मुहूर्त का वास्तविक समय सूर्योदय के अनुसार परिवर्तित होता रहता है.

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अभिजीत मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य के लिये जाना जाता है. दिन के समय में कोई भी शुभ काम को करने के लिये बिना पेचीदगियों के, चुना जा सकता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्‍त तक के बीच के 15 मुहूर्तों में से आठवें नंबर का और सबसे अच्‍छा होता है. आकाश मंडल में मध्‍य की स्थिति में होने से इसे स्‍वयं सिद्ध माना जाता है. इसकी विशिष्‍टता यह भी है कि बिना विशेष योग के भी इस मुहूर्त में किया गया फलदायी होता है. इस समय में कोई भी कार्य करने पर विजय प्राप्त होती है.

डॉ. काशीनाथ झा कहते हैं कि अभिजीत का अर्थ है ‘विजेता’ और मुहूर्त अर्थात ‘समय’. मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त के दौरान भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का संहार किया था. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भगवान विष्णु का आशीर्वाद है जो इस मुहूर्त की मुद्रा के दौरान अपने सुदर्शन चक्र से असंख्य दोषों का नाश करते हैं. मान्यताओं के अनुसार यदि किसी भी शुभ काम में लग्न का आभाव हो तो अभिजीत मुहूर्त का प्रयोग करना चाहिए.

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मुहूर्त के लिए दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और दिनमान का योग देखा जाता है, और उसके आधार पर निर्णय लिया जाता है कि कौन-सा कार्य कब करें कि सफलता सुनिश्चित हो. लेकिन ये गणनाएं जन सामान्य के लिए कुछ जटिल होती हैं. ऐसे में जिन्हें पंचांग की जानकारी न भी हो तो अभिजीत मुहूर्त सभी शुभ कर्म कर सकते हैं.

यहां यह भी जान लेना आवश्यक है कि अभिजीत मुहूर्त और अभिजीत नक्षत्र का कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होता, परन्तु यदि अभिजीत मुहूर्त और अभिजीत नक्षत्र एक साथ पड़ जाए तो अत्यंत ही शुभ माना जाता है. एक विशेष बात यह है कि अभिजीत मुहूर्त में दक्षिण दिशा की यात्रा को निषेध किया गया है.

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