मोदी सरकार की बड़ी सौगात, घरेलू गैस सिलेंडर पर अब मिलेगी दोगुनी सब्सिडी

PATNA: मोदी सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है. मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर दी जा रही सब्सिडी को लगभग दोगुना कर दिया है. इससे उपभोक्ताओं पर एक दिन पहले कीमतों में की गई बढ़ोतरी की मार का कम असर पड़ेगा. इस बीच सरकार ने सफाई देते हुए कीमतों में बढ़ोतरी का कारण भी बताया है.

दरअसल पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया कि सरकार गैस सिलेंडर पर मिलने वाली राशि को लगभग दोगुना कर दिया है. बयान में कहा गया है कि राजधानी दिल्ली में अभी तक प्रति सिलेंडर 153.86 रुपए की सब्सिडी मिलती थी जिसे बढ़ाकर 291.48 रुपए कर दिया गया है. इसी प्रकार से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत बांटे गए कनेक्शन पर अभी तक 174.86 रुपए प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती थी. अब इसे बढ़ाकर 312.48 रुपए प्रति सिलेंडर कर दिया गया है. आपको बता दें कि घरेलू उपभोक्ताओं को एक साल में 12 सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती है. इससे ज्यादा खरीदने पर बाजार भाव से भुगतान करना होता है.

तो वहीं तेल एवं गैस विपणन कंपनियों के 12 फरवरी बुधवार को ही गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की थी. घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 144.50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी. इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 858.50 रुपए प्रति सिलेंडर पर पहुंच गई थी. आपको बता दें कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम गैस होती है.

केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दोगुनी करने से उपभोक्ता को बड़ा फायदा होगा. दरअसल, तेल कंपनियों ने प्रति सिलेंडर 144.50 रुपए की बढ़ोतरी की थी, जबकि उनकी सब्सिडी में 137.62 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है. इस प्रकार उपभोक्ताओं पर सिर्फ करीब 6.88 रुपए प्रति सिलेंडर का बोझ पड़ेगा. हालांकि, उन्हें गैस खरीदने के लिए पहले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.

घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पूरे देश में सरकार का विरोध हो रहा है. इससे सरकार दबाव में आ गई है. इसी को देखते हुए सरकार ने गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सफाई दी है. सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उसे घरेलू बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है. सरकार के कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी 2020 में एलपीजी की कीमत 448 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर 567 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर पहुंच गई हैं, जिस कारण उसे कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

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