बिहार में बना नया क़ानून, पटना में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने वाले भवन होंगे सील

PATNA : सरकार ने राजधानी समेत राज्य के सभी शहरों के निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत शुरू की गई इस योजना को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। नगर विकास विभाग ने बिल्डिंग बाइलॉज में संशोधन कर सभी निर्मित और निर्माणाधीन भवनों के लिए यह अनिवार्य किया है। अादेश नहीं माने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ भवनों को सील किया जाएगा।

100 वर्गमीटर से ज्यादा के क्षेत्रफल वाले सभी निजी मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने वाले भवनों को सील किया जाएगा। हालांकि, सीलिंग या जुर्माना से पहले नोटिस के माध्यम से सिस्टम लगाने के लिए 30 दिनों का समय दिया जाएगा। विभाग ने सभी नगर निकायों से ऐसे भवनों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। अबतक 28 नगर निकायों ने 653 मकानों की सूची तैयार की है, जिसमें सिस्टम लगाया जाना है।

नए भवनों का नक्शा पास कराने के लिए रेन वाटर सिस्टम का प्रावधान अनिवार्य होगा। नगर विकास विभाग का यह आदेश सरकारी, निजी और वाणिज्यिक सभी तरह के भवनों पर लागू होगा। बिना रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नए निर्माण के लिए नक्शा पास करने पर रोक लगा दी गई है। यदि कोई इसका उल्लंघन करते पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

15 मीटर ऊंचे व 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले वाणिज्यिक भवनों के लिए पहले से है लागू
नगर विकास विभाग पिछले महीने ही 15 मीटर ऊंचे और 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले वाणिज्यिक भवनों के लिए सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। जिन भवनों में वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित होती हैं, उनमें सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। विभाग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग आर्गेनाइजेशन का भवनों की जांच का जिम्मा सौंपा है। जिन भवनों में वाटर रिचार्ज सिस्टम नहीं लगा होगा उसको सील किया जाएगा।

सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने वाले मकानों को संपत्ति कर में पांच फीसदी छूट देगी। नगर विकास विभाग ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए ऐसी संरचनाओं का निर्माण कराने वालों को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए संपत्ति कर में पांच फीसदी छूट देने का फैसला किया है। यह योजना सभी नगर निकायों में लागू होगी।

भू-जलस्तर को रीचार्ज करने के लिए यह पुरानी तकनीक है, जिसके जरिए छतों पर जमे बारिश के पानी को रीचार्ज पीट के जरिए जमीन में उतारा जाता है। इस तकनीक के जरिए भू-जलस्तर में आ रही गिरावट को रोका जा सकता है। इससे वाटर लेवल सही रहता है। उसमें कमी नहीं आती।

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