बाइक, फ्रिज, वाशिंग मशीन रखने वालों को वपास करना होगा राशन कार्ड, सरकारी आदेश पर बवाल

सरकार ने सम्पन्न परिवार राशन कार्ड वापस मांगा, राशन कार्ड पर ‘आरक्षण’ पॉलिटिक्स!:सरकार ने अपात्रों को कार्ड वापस करने को कहा, सवर्ण नेता बोले- आरक्षण के साथ भी ऐसा हो : अभी सरकार ने नियम निकाला है कि शहरी क्षेत्र के बाइक, फ्रिज, वाशिंग मशीन, तीन कमरा और उससे अधिक छतदार पक्का मकान, चार पहिया वाहन व एसी उपयोग करने वाले परिवार को अविलंब राशन कार्ड वापसी करें। इस पर अब बहस तेज हो गई है। अब कुछ सवर्ण ने राशन कार्ड के मसले को आरक्षण से जोड़ते हुए मांग कर रहे हैं कि जिस तरह राशन कार्ड के लिए नियम बने हैं उसी तरह से आरक्षण के लिए नियम बने, उनका कहना है कि इनको एक बार आरक्षण मिल गया है। उनको दुबारा इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए।

सरकार ने सम्पन्न परिवार राशन कार्ड वापस मांगा

दरअसल, सरकार के तरफ शहरी क्षेत्र के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र के तीन व चार पहिया वाहन प्रयुक्त करने वाले परिवार, सरकारी नौकरी करने वाले परिवार, आयकर अदा करने वाले, एक सिंचाई वाले उपकरण के साथ ढाई एकड़ सिंचित भूमि, 5 एकड़ सिंचित भूमि, व्यवसायिक कर अदा करने वाले व अन्य साधन सम्पन्न परिवार को अपना राशन कार्ड वापस करने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तहत ये संशोधन किया गया है।

सरकार अविलंब आरक्षण वापस लें – गजेंद्र

सरकार के इस फैसले के बाद सवर्ण नेताओं ने मांग करनी शुरू कर दी है। जीतन राम मांझी की जीभ काटने की धमकी देने वाले भाजपा के पूर्व नेता गजेंद्र झा कहते हैं कि जिस तरह से राशन कार्ड को लेकर सरकार ने यह नियम बनाए हैं वह बेहतर है, लेकिन अब आरक्षण को लेकर भी सरकार अविलंब निर्णय ले। जिनको एक बार आरक्षण का लाभ मिल चुका है। वह अब दोबारा इसका लाभ ना लें। गजेंद्र झा सरकार से मांग करते हैं कि इस पर भी सरकार जल्द से जल्द फैसला ले।

जो आरक्षण से सम्पन्न हो गए फिर उन्हें दोबारा आरक्षण क्यों- आशुतोष झा

भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष झा कहते हैं कि राशन कार्ड में जिसके पास कोई वाहन और मकान है उसे वंचित किया जा रहा है। तो सरकार से हम पूछना चाहते हैं कि जिन्होंने एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया है वह कैसे दलित रह गए। कैसे पिछड़ा रह गए। कैसे करीब रह गए। जिसके यहां सभी संसाधन है, गाड़ी है मकान है, जो अच्छा इनकम कर रहे हैं, जो प्रगति कर रहे हैं, उनको आरक्षण के दायरे से क्यों नहीं अलग किया जा रहा है।

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