पटना में घर किराया देने पर मकान मालिक को देना होगा तीन गुना टैक्स, 25 साल बाद बढ़ेगा होल्डिंग टैक्स

अब घर में किराएदार रखने वालों को भी व्यवसायिक होेल्डिंग टैक्स देना होगा। टैक्स व्यावसायिक हो जाने पर मकान मालिकों को पहले से लगभग तीन गुणा टैक्स देना होगा। वर्तमान में छत वाले घरों का प्रधान मुख्य सड़क पर 18 रुपए, मुख्य सड़क पर 12 रुपए और अन्य सड़क पर छह रुपए प्रति वर्गफुट की दर से होल्डिंग टैक्स लगता है। व्यवसायिक होने पर उन्हें प्रधान मुख्य सड़क पर 54 रुपए, मुख्य सड़क पर 36 रुपए और अन्य सड़क पर 18 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। नगर निगम ने 25 साल बाद नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आवासीय व व्यावसायिक भवनाें अाैर सड़कों का नए सिरे से वर्गीकरण भी होगा। यह निर्णय मंगलवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में लिया गया। एजेंसी को सड़कों का निर्धारण करने का जिम्मा दिया गया है।

निगम बोर्ड और नगर विकास विभाग की मंजूरी के बाद लागू होगी नई दर नगर निगम की स्थायी समिति के इस फैसले को अब निगम बोर्ड में भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी के बाद नगर विकास विभाग में भेजा जाएगा। वहां से पास होने के बाद टैक्स की नई दर लागू हो जाएगी। निगम ने इस वर्ष 300 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। कमिश्नर का कहना है कि पटना की आबादी और क्षमता को देखते हुए ये टारगेट रखा गया है। सड़क वर्गीकरण से इसे बढ़ाया जा सकता है। जैसे ही कोई सड़क मुख्य सड़क के रूप में नोटिफाई होगी तो उस पर मौजूद भवनों का होल्डिंग टैक्स बढ़ जाएगा।

नगर आयुक्त अमित कुमार पांडेय ने कहा कि 20 फीट, 40 फीट और इससे अधिक चौड़ी सड़कों का वर्गीकरण हाेगा। राजधानी में अभी प्रधान मुख्य सड़क, मुख्य सड़क व अन्य सड़क के आधार पर होल्डिंग टैक्स का निर्धारण कर वसूली की जाती है। नए सिरे से सड़कों का निर्धारण होने के बाद टैक्स दर को भी रिवाइज किया जाएगा। अभी 1994 में हुए निर्धारण के अाधार पर होल्डिंग टैक्स देना पड़ता है।

नगर निगम क्षेत्र में हर पांच साल पर होल्डिंग टैक्स को रिवाइज किया जाना है। नगरपालिका अधिनियम में यह प्रावधान है। पर राजनीतिक कारणाें से पिछले 25 वर्षों से इसे रिवाइज नहीं किया गया है। अब नगर निगम पर अपनी आय बढ़ाने का दबाव बना है, तो इसकी कवायद शुरू हुई है। अब किराएदार रखने वाले मकानों को भी व्यावसायिक के दायरे में लाया जाएगा। वर्तमान में आवासीय मकानाें के कर की दर काफी कम है। आवासीय घराें में व्यावसायिक गतिविधियां होती हैं, लेकिन नियमों का हवाला देकर वे बच जाते हैं।

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