परीक्षा सेंटर पर जब शहाबुद्दीन ने पुलिस अफसर को मारा थप्पड़, रातों-रात नेता से बन गए बाहुबली

पटना 1 मई 2023 : कुछ दिन पहले सोनी पर एक वेब सीरीज ने सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया था. नाम था रंगबाज. अभिनेता थे विनीत. इस फिल्म के बारे में कहा जाता है कि अब फिल्म बिहार के बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन की जीवनी पर आधारित था. इस वेब सीरीज के एक सीन में दिखाया जाता है कि एक पुलिस वाला सहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पर जाता है और वह कहते हैं कि आज नहीं कल. पुलिसवाला जबरन उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास करता है और शहाबुद्दीन जोर से एक थप्पड़ लगा देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तव में उस दिन क्या हुआ था. आखिर क्यों शहाबुद्दीन ने उस पुलिस वाले को थप्पड़ मारा था. नहीं जानते हैं तो आइए आपको बताते हैं.

धार की राजनीति में शहाबुद्दीन का नाम जहां एक और दबंगई के कारण लिया जाता है वहीं दूसरी ओर उन्हें गरीबों का मसीहा कहा जाता. इंसान के जीवन में दो पहलू होता है एक अच्छाई का दूसरा बुराई का. शहाबुद्दीन में दोनों था. गरीबों का मसीहा था वहीं उनकी खिलाफत करने वालों के लिए दबंग था. कहा जाता है कि 1 दिन शहाबुद्दीन मैट्रिक परीक्षा सेंटर पर जांच करने पहुंच गए थे. उस समय तक वे सांसद बन चुके थे.

शहाबुद्दीन जब परीक्षा सेंटर पर जांच करने पहुंचे तो वहां ड्यूटी कर रहे एक पुलिस जवान ने उन्हें रोक दिया और कहा कि आप सांसद हैं परीक्षा सेंटर में घुसकर जांच करने की आपकी हैसियत नहीं है. साबुद्दीन के लोगों ने पहले उस पुलिस जवान को समझाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस जवान ने मानने से साफ इंकार कर दिया. सहाबुद्दीन को यह नागवार गुजरा और उसने आव देखा न ताव ड्यूटी पर ही पुलिस वाले को दे दनादन थप्पड़ मार डाला.

ऑन ड्यूटी पुलिस जवान पर हाथ उठाने के कारण शहाबुद्दीन का इमेज एक बाहुबली वाला बन गया. दूसरी ओर पुलिस वाले शहाबुद्दीन के खिलाफ हो गए थे और किसी भी तरह उसे दबोचना चाहते थे. हालांकि लालू की पार्टी से होने के कारण और लालू के खासम खास होने के कारण शहाबुद्दीन पर पटना पुलिस मुख्यालय द्वारा हमेशा रियायत बढ़ता जाता था. इस बार सिवान पुलिस ने तय कर लिया था आला अधिकारियों को जानकारी दिए बिना उनके घर पर छापा मारना है. कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि सिवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को पहले बंधक बना दिया गया और उसके बाद शहाबुद्दीन के घर पर कार्रवाई की गई.

एसपी और डीएम ने पुलिस वालों का साथ नहीं दिया इसलिए उनकी कार्यों को तोड़ दिया गया बाद में आला अधिकारियों को भी पुलिस जवानों का साथ देना पड़ा.

रोचक है सहाबुद्दीन का राजनीतिक कैरियर और दबंगई स्टाइल

एक बाहुबली से राजनेता बनने का मोहम्मद शहाबुद्दीन का सफर बड़ा ही दिलचस्प रहा है। बिहार में कभी अपराध का बड़ा नाम रहे शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई1967 को सीवान जिले के हुसैनगंज प्रखंड के प्रतापपुर गांव में हुआ था। सीवान के चार बार सांसद और दो बार विधायक रहे शहाबुद्दीन ने कॉलेज के दौरान अपराध की दुनिया का दामन थाम लिया था। 1980 में डीएवी कॉलेज से राजनीति में कदम रखने वाले इस नेता ने माकपा व भाकपा के खिलाफ जमकर लोहा लिया और इलाके में ताकतवर राजनेता के तौर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। भाकपा माले के साथ उनका तीखा टकराव रहा। सीवान में दो ही राजनीतिक धुरिया थीं। एक शहाबुद्दीन व दूसरी भाकपा। 1993 से 2001 के बीच सीवान में भाकपा माले के 18 समर्थक व कार्यकर्ताओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर व वरिष्ठ नेता श्यामनारायण भी इसमें शामिल थे। इनकी हत्या सीवान शहर में 31 मार्च 1997 को कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी।

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