काला हिरण शिकार मामले में फिर कोर्ट में पेश नहीं हुए Salman, 18 बार मिल चुकी है हाजिरी माफी

Desk: जोधपुर हाईकोर्ट से काला हिरण शिकार मामले में कोर्ट में उपस्थित होने से मिली राहत के बाद आज यानि शनिवार को फिल्म अभिनेता सलमान खान के वकील की ओर से पेश हाजिरी माफी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने स्वीकार कर लिया. काला हिरण शिकार प्रकरण व आर्म्स एक्ट मामले में सलमान को 18वीं बार हाजिरी माफी मिली है. हाईकोर्ट ने सलमान को कोर्ट में वर्चुअली उपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की है. लेकिन वह वर्चुअली भी उपस्थित नहीं हुए और हाजिरी माफी मांग ली गई. इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 फरवरी को होगी.

वहीं झूठा शपथ पत्र पेश करने के मामले में सरकार की ओर से सलमान के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब देने के लिए सलमान की तरफ से समय की मांग की गई. अब इस मामले की सुनवाई 9 फरवरी को होगी. आज सलमान की तरफ से उनके वकील ने कोर्ट में हाईकोर्ट के ऑर्डर को पेश कर हाजिरी माफी के लिए आवेदन किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

अप्रैल 2018 में सलमान को मिली थी 5 साल की सजा

काला हिरण शिकार मामले में अप्रैल 2018 में सलमान खान को ट्रायल कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई थी. इसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी. इसके बाद वह एक बार कोर्ट में पेश हुए. ढाई साल की इस अवधि में इसके अलावा वह हर पेशी में कोई न कोई किसी न किसी कारण से हाजिरी माफी लेते रहे. कोरोना काल में उनकी पहली पेशी 18 अप्रैल को, दूसरी 4 जून को, तीसरी पेशी 16 जुलाई को, चौथी 14 व पांचवी 28 सितंबर को तथा छठी पेशी 1 दिसंबर और सातवीं 16 जनवरी को थी. सलमान की तरफ से कोरोना के नाम पर इनसे हाजिरी माफी मांगी गई. आज एक बार फिर हाजिरी माफी स्वीकार की गई.
सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम हो चुके हैं बरी

काला हिरण शिकार प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने 5 अप्रैल 2018 को सलमान खान को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी. इस मामले में सह आरोपी फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू व सोनाली बेन्द्रे को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. सलमान खान को उस समय गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था. तीन दिन बाद वे कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर रिहा हुए थे. सलमान खान ने उन्हें सुनाई गई पांच साल की सजा को चुनौती दे रखी है. वहीं आर्म्स एक्ट के मामले में कोर्ट ने सलमान को बरी कर दिया था. राज्य सरकार ने कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती दे रखी है.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *