दरभंगा के शादाब मोइज़ी को मिला राम नाथ गोयनका अवार्ड, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

दरभंगा के शादाब मोइज़ी को राम नाथ गोयनका अवार्ड मिला है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें सम्मानित किया। बहुत काम लोगों को पता होगा की इंडियन एक्सप्रेस के फाउंडर सम्पादक राम नाथ गोयनका का जन्म भी बिहार के दरभंगा में हुआ था। शादाब को कुछ दिन पहले यह अवार्ड मिला। आज उन्होंने अपने फेसबुक वाल पर एक भावुक करने वाली पोस्ट लिख कर लोगों को धन्यवाद बोला है।

20/01/2020 को अपने हाथ में #RamnathGoenka Award आया. इस अवॉर्ड के लिए सबसे पहले उस रब का शुक्रिया जिसने मुझे यहां तक पहुंचाया.

भले ही इस अवॉर्ड की ख़ुशी है लेकिन दिल में एक कसक है, दर्द है. ये अवॉर्ड मुझे मुज़फ़्फ़रनगर दं/गे से जुड़ी उस कहानी के लिए मिला है जिसमें कई लोगों को मा/र दिया गया, कई बेघर हो गए. फाइलों में 15 लोग अब तक ला/पता हैं, लेकिन कई लोगों के परिवार ने अपनों को अपनी आंखों के सामने म/रते देखा है. उनके क़ा/तिल अब भी ‘आज़ाद’ हैं.

इस अवॉर्ड को लेते हुए एक और उलझन थी कि लाखों लोग सड़कों पर हैं, 25 से ज़्यादा लोगों को मा/र दिया गया. हमारे देश में नागरिकता को ध/र्म का कपड़ा पहनाया जा रहा है, ताकि ‘कपड़े से पहचाना’ जा सके. जिसके वोट से सत्ता मिली उसे chronology समझाया जा रहा है कि बताओ तुम कौन हो. इसलिए ऐसे वक़्त में ये अवॉर्ड लेना ज़रूरी था ताकि ये बताया जा सके कि तुम कितनी भी आवाज़ दबाओगे इंक़लाब क़ैद नहीं रह सकता.

ये स्टोरी इसलिए कर सका क्योंकि The Quint और मेरे बॉस/एडिटर/मेंटर/ ने मुझे ये आज़ादी दी, बिना किसी से ड’रे आगे बढ़ने की. सच दिखाने की. इस स्टोरी को एडिट Md Ibrahim ने किया था, शुक्रिया मेरे भाई. तुम्हारी एडिटिंग कमाल है.ये अवॉर्ड और भी ख़ास है क्योंकि मेरे अम्मी-अब्बू साथ हैं.. अम्मी-अब्बू के सामने जब ये अवॉर्ड मिला तब उनके चेहरे पर खुशी और आंखों में खुशी वाला आंसू था, यही मेरी जीत है.

लोग कह रहे हैं कि ये अवॉर्ड भारत मे पत्रकारों का सबसे बड़ा अवॉर्ड है, कुछ लोग इसे पत्रकारों का नोबेल पुरस्कार कह रहे हैं, मैं नहीं जानता कि मैं इस क़ाबिल हूं भी या नहीं. मुझसे बेहतर और ज़्यादा मेहनत करने वाले लोग भी हैं इसलिए मुझे ये अवॉर्ड मिलने का मतलब ये नही है कि वो हज़ारों लोग बेहतर नहीं हैं, बस इस बार मौक़ा मुझे मिला है, अगली बार कोई और.

मुझे शायद ज़िंदगी में कभी अवॉर्ड नहीं मिला, स्कूल-कॉलेज में भी नहीं. इसलिए समझ नहीं पा रहा हूं कि अवॉर्ड मिलने के बाद क्या बोलते हैं, लिखते हैं. हज़ारों दोस्त, बड़े, छोटे, रिश्तेदार, गुरु, जिनसे कभी नहीं मिला वो भी मैसेज और कॉल कर रहे हैं, सबका शुक्रिया. किसी का जवाब नहीं दे सका या कॉल नहीं उठा सका उसके लिए माफ़ी. आप फिर कॉल और मैसेज कर सकते हैं, मैं बिल्कुल जवाब दूंगा.

इस अवॉर्ड के पीछे किसी का साथ, प्यार, दुआ, मेहनत, यक़ीन, वक़्त, और sacrifice है. आप लोगों की दुआ और मोहब्बत का बदला मैं नहीं चुका सकता हूं, लेकिन ये यक़ीन के साथ कहूंगा, मैं हक़ पर रहूंगा, साथ बने रहिये.. अभी तो खेल शुरू हुआ है..

Shadab Moizee

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