अभी-अभी : दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नि-धन

अभी अभी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि दिल्ली की पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का नि-धन हो गया है। 81 वर्षीय शीला दीक्षित लंबे समय से बीमार थीं। फिलहाल कांग्रेस ने उन्हें दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे रखी थी। 15 साल तक राजधानी की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में नि’धन हो गया।

शीला दीक्षित दिल्ली की राजनीति में आने से पहले यूपी में अपना दांव आजमा चुकी हैं, हालांकि उत्तर प्रदेश में उनका राजनीतिक अनुभव अच्छा नहीं रहा और वर्ष 1989 के बाद वह यूपी में तीन लोकसभा चुनाव हारी। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के खिलाफ आंदोलन के चलते शीला दीक्षित और उनके 82 साथियों को अग्सत 1990 में 23 दिल तक जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।

यूपी की राजनीति में शीला दीक्षित 1994 में पहली बार कन्नौज की सीट से चुनाव लड़ा और वह यह चुनाव जीत गयी। लेकिन यह चुनाव इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे जिसमें कांग्रेस को सहानुभूति वोट मिले थे। लेकिन इस लहर के बाद तीन बार शीला लगातार चुनाव हारी। शीला राजीव गांधी सरकार में पीएमओ में राज्यमंत्री भी रह चुकी है और आखिरी बार उन्होंने 1996 में यूपी में चुनाव लड़ा था।

यूपी में बुरी तरह से विफल होने के बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली का रुख किया और कांग्रेस ने उन्हें दिल्ली की कमान सौंपी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया और बतौर दिल्ली की मुख्यमंत्री उन्होंने काफी लंबी पारी खेली। छात्रावस्था में शीला दीक्षित ने दिल्ली में 1970 युवा महिला एसोसिएशन की चेयरपर्सन भी थी और उनके प्रयासों के चलते ही कामकाजी महिलाओं के लिए दो हॉस्टल बनें जोकि आज भी काफी सफलतापूर्वक चल रहे हैं।

शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनकी पढ़ाई दिल्ली के कॉवेंट ऑफ जीसस मैरी स्कूल से हुई थी जिसके बाद उन्होंने मिरांडा हाउस से स्नातक की पढ़ाई कि और फिर इतिहास विषय में परास्नातक की डिग्री उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से प्राप्त की।

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