शोभा आहोतकर को बनाया जा सकता है बिहार का अगला DGP, नाम सुन थर—थर कांप उठते हैं अपराधी

शोभा ओहतकर 1990 बैच के आईपीस अधिकारी रही है. लेडी सिंघम के नाम से नवाजा जाता है. आज भी माफिया और अपराधियों में इनके नाम का खौफ है. 9 दिसंबर को वर्तमान डीजीपी रिटायर हो रहे हैं. अब सवाल उठता है कि बिहार का अगला डीजीपी कौन बनेगा. किनका नाम इस रैस में शामिल है. उसमें एक शोभा ओहतकर भी है. हलांकि इनका मिजाज कुछ अलग है ऐसे में सरकार इन पर दाव लगाये थोड़ा मुश्किल लगता है. लेकिन आज भी ओहतकर का खौफ बिहार के माफिया और अपराधियों में है.

बिहार की पहली महिला DG हैं शोभा अहोटकर:22 साल की उम्र में IPS बनीं, खौफ से अपराधी भी इन्हें कहते हैं ‘हंटर वाली’ : बात तब कि है, जब बिहार और झारखंड एक था। अपराध का ग्राफ काफी ऊपर था। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसी आपराधिक वारदातें चरम पर थीं। उस वक्त टेक्निकल सर्विलांस का दौर नहीं था। ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए ही पुलिस काम करती थी। इस कारण शोभा अहोटकर जिस जिले में SP बनकर जाती थीं, वहां पब्लिक का विश्वास जीतने में कामयाब हो जातीं। फील्ड में इनकी सबसे पहली पोस्टिंग पटना सिटी में बतौर ASP हुई थी। क्राइम कंट्रोल करने के लिए अपराधियों में खौफ पैदा करना इनकी प्रायोरिटी थी। इस कारण शोभा अहोटकर का बिहार में दूसरा नाम ‘हंटरवाली’ पड़ा। अपराधी भी इन्हें यही कहते हैं। बीच में 7 साल महाराष्ट्र में काम करने के बाद 5 साल के लिए सेंट्रल डेप्यूटेशन पर रहीं। उस दरम्यान एयर इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिक्योरिटी के पोस्ट पर थीं। अपने कैडर में वापस लौटने के बाद बिहार सरकार ने दिसंबर 2020 में शोभा अहोटकर का प्रमोशन कर DG बनाया।

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 1990 बैच की सीनियर अधिकारी अहोटकर जन्म से मराठी, शिक्षा से हैदराबादी और मन से बिहारी हैं। पिता बलराम अहोटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर थे। इस कारण प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक की इनकी पूरी पढ़ाई वहीं हुई। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद से साल 1989 में पॉलिटिकल साइंस से MA किया। फिर पहले अटेम्प्ट में ही UPSC की परीक्षा पास की। इनके पिता का भी सपना था कि उनकी बेटी हर हाल में पुलिस सर्विस को ज्वाइन करे, चाहे कैडर कोई भी मिले। शोभा अहोटकर ने भी अपने पिता से किए वायदे को पूरा कर दिखाया। भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद इन्हें बिहार कैडर मिला।

बात तब कि है, जब बिहार और झारखंड एक था। अपराध का ग्राफ काफी ऊपर था। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और रंगदारी जैसी आपराधिक वारदातें चरम पर थीं। उस वक्त टेक्निकल सर्विलांस का दौर नहीं था। ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए ही पुलिस काम करती थी। इस कारण शोभा अहोटकर जिस जिले में SP बनकर जाती थीं, वहां पब्लिक का विश्वास जीतने में कामयाब हो जातीं। फील्ड में इनकी सबसे पहली पोस्टिंग पटना सिटी में बतौर ASP हुई थी। क्राइम कंट्रोल करने के लिए अपराधियों में खौफ पैदा करना इनकी प्रायोरिटी थी। इस कारण शोभा अहोटकर का बिहार में दूसरा नाम ‘हंटरवाली’ पड़ा। अपराधी भी इन्हें यही कहते हैं। बीच में 7 साल महाराष्ट्र में काम करने के बाद 5 साल के लिए सेंट्रल डेप्यूटेशन पर रहीं। उस दरम्यान एयर इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिक्योरिटी के पोस्ट पर थीं। अपने कैडर में वापस लौटने के बाद बिहार सरकार ने दिसंबर 2020 में शोभा अहोटकर का प्रमोशन कर DG बनाया।

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