सर रहम करहो, हमर घर नै तोरहो, नहीं माने अधिकारी गृह प्रवेश के दूसरे ही दिन चला दिया बुलडोजर

पुलिस ने एक-एक ईंट जोड़ने का लिया था पैसा, 4 लाख मकान बनने तक : राजीवनगर के नेपाली नगर, कंचनपुरी और पंचवटी काॅलोनी में रविवार को बुलडोजर चला। स्थानीय लोग इसे ज्यादती मान रहे हैं। उनका कहना है कि हमलोग अवैध हैं तो घर बनाने क्यों दिया गया? सड़क, बिजली, पानी की सुविधा क्यों दी गई? उनका यह भी कहना है कि 10-12 साल पहले किसानों अाैर को-ऑपरेटिव से 5 से 7 सात लाख प्रति कट्ठा के हिसाब से जमीन ली। मकान बनाने लगे तो राजीवनगर पुलिस के साथ-साथ आवास बोर्ड के अधिकारियों को पैसा भी दिया। अब उनके आशियाने पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो मिट्टी भराई से लेकर घर की ढलाई तक का रेट फिक्स है। आवास बोर्ड की जमीन राजीवनगर के साथ-साथ दीघा थाना के क्षेत्र में भी आती है। लोगों काे जमीन पर मिट्टी भराने का प्रति कट्ठा के हिसाब से 50 हजार रुपए पुलिस प्रशासन को देने पड़ते है।

जमीन की बाउंड्री का 70 हजार रुपए प्रति कट्ठा का रेट तय है। एक मंजिला मकान बनाना है तो 1.50 लाख रुपए लगेंगे। इसके अलावा पुलिसकर्मी मिठाई का पैसा मांगने आ जाते हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने कहा-जब हम मकान बना रहे थे तब दारोगा जी आए और कहा कि घर बना रहे हैं तो हमलोगों को मिठाई भी खिला दीजिए। बाद में पता चला कि मिठाई का रेट 1.50 लाख रुपए प्रति कट्ठा है। यह पैसा पुलिस और आवास बोर्ड के अधिकारियों के बीच बंटता है। जो पैसा देने में आनाकानी करता है उसके खिलाफ ही कार्रवाई होती है।

अवैध हैं तो घर बनाने क्यों दिया, सड़क-बिजली की सुविधा कैसे दी
2012 से यहां रह रही हूं। किसान से जमीन लेकर घर बनाया। घर बनाने के दौरान पुलिस आई थी। पुलिस ढलाई करने का 50 हजार से एक लाख तक लेती है। -सरोजा देवी, पंचवटी काॅलोनी
को-ऑपरेटिव से 10 साल पहले जमीन ली थी। जब घर बनाने लगे तब सिपाही ही पैसा लेने आया था। शुरुआत में ज्यादा नहीं लिया। ढलाई की बारी आई तब मोटा पैसा लिया था। -राजकिशोर सिंह, नेपाली नगर

2013 में हमने किसान से जमीन ली थी। सरकार ने ही हमें बिजली, सड़क और पानी का कनेक्शन दिया है। जब अवैध थे तब घर बनाने क्यों दिया गया। जब घर बना रहे थे तब राजीवनगर पुलिस पैसा लेकर गई है। -मुन्ना जायसवाल, राजीवनगर

2014 में हमने जमीन ली। तब कई घर बने हुए थे। कई अधिकारियाें के भी। घर बना रहे थे तब पुलिस आई थी पैसा लेने। पहले तो बोली मिठाई खाने के लिए पैसा दीजिए। बाद में ढलाई के समय मोटी राशि दी थी। -नवीता कुमारी, पंचवटी काॅलोनी

छह साल से इस माेहल्ले में रह रहे हैं। जब हम अवैध ही थे तो घर बनाने के वक्त ही क्यों नहीं कार्रवाई की गई? उस वक्त तो पैसा लेकर घर बनाने दे दिया गया। अब पुलिस बुलडोजर चला रही है। यह कहां का न्याय है?-गुंजा कुमारी, नेपालीनगर

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